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भगवान शंकर को बाहरी सुंदरता, दिखावे या आडंबर से कोई मतलब नहीं है। उनके लिए भक्ति, सच्चाई और सरल हृदय ही सबसे बड़ी सुंदरता है। वे भस्म लगाते हैं, बाघम्बर पहनते हैं, गले में सर्प धारण करते हैं, श्मशान में रहते हैं—यह सब इस बात का प्रतीक है कि 👉 संसार की माया, रूप-रंग और अहंकार का कोई महत्व नहीं है। भगवान शिव तो उन पर प्रसन्न होते हैं जो— निष्कपट हों सच्चे मन से याद करें बिना दिखावे के भक्ति करें दूसरों के लिए करुणा रखें इसलिए कहा जाता है: “भोलेनाथ को बस भोला दिल चाहिए, साज-सिंगार नहीं।” वे देवों के देव होते हुए भी भूत-प्रेत, गरीब, साधारण, असहाय सभी को अपनाते हैं। यही कारण है कि उन्हें आशुतोष (जल्दी प्रसन्न होने वाले) और भोलानाथ कहा जाता है।

Comments (3)

Rohit  Patel

Rohit Patel

Feb 17, 2026

जी बड़े भाई जी 🌹🍨🤝🤗💞💞💞💞

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Feb 17, 2026

जय भोले नाथ जी 🙏

Rohit  Patel

Rohit Patel

Feb 17, 2026

बम् बम् भोले 💞💞💞💞