
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
62 days ago
जय भोले नाथ जी जय श्री राधे कृष्णा जी शुभ प्रभात जी *पैसा* भी क्या *मस्त चीज* है, बचपन में *मांगना* पड़ता है.... *जवानी* में *कमाना* पड़ता है, और *बुढ़ापे* में... यहीं *छोड़कर जाना* पड़ता है...! **समय का चक्र और पैसे की माया:** * **बचपन:** जब इंसान 'अधीन' होता है, हर छोटी ज़रूरत के लिए अपनों का मोहताज। * **जवानी:** जब इंसान 'आधीन' (खुद के) होता है, सपनों को हकीकत में बदलने की दौड़। * **बुढ़ापा:** जब इंसान 'हीन' हो जाता है—सब कुछ पीछे छोड़कर जाने का सत्य स्वीकार करने का समय। शायद इसीलिए कहा जाता है कि पैसा जीवन जीने का साधन तो है, लेकिन अंततः यह 'संस्कार' और 'यादें' ही हैं जो पीछे छूटती हैं।

Comments (2)

सविता
Jun 29, 2026
"करता करे ना कर सके, शिव करे सो होय। तीनों लोक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा ना कोई।"

बरखा शर्मा
Jun 29, 2026
🌷🌷har har mahadev ji🌷 Shubh prabhat ji 🙏🌷🌷
