MyMandirInstall

27.6.2026 मैं देखता हूं, *"जब भी कोई दो व्यक्ति बैठते हैं, तो वे किसी न किसी की निंदा चुगली अथवा शिकायतें करने लगते हैं।" "यदि वे दोनों कोई रचनात्मक बात करते, कोई सकारात्मक चर्चा करते, कोई प्रसन्नता बढ़ाने वाली बात करते, कोई आध्यात्मिक चर्चा करते, तो दोनों को लाभ होता।"* *"परंतु अधिकांश लोगों के मस्तिष्क में नकारात्मकता भरी पड़ी है। उसी को दूसरों पर उड़ेलने में लोग लगे रहते हैं। अपना और दूसरों का समय नष्ट करते हैं। परिणाम कुछ भी नहीं आता = शून्य। बल्कि अपना भी मूड खराब करते हैं और दूसरे का तनाव भी बढ़ा देते हैं।"* वे लोग यह भूल जाते हैं कि *"संसार में कोई भी व्यक्ति सर्वगुण संपन्न नहीं होता। प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमियां होती हैं। केवल एक ईश्वर ही सर्वगुण संपन्न है, जिसमें कोई कमी नहीं है। इतना होने पर भी लोग ईश्वर को भी नहीं छोड़ते। उसमें भी कमियां निकालते हैं। झूठे आरोप लगाते हैं। ऐसे लोगों को तो कोई भी प्रसन्न नहीं कर सकता। और न वे कभी प्रसन्न हो सकते। वे जीवन भर स्वयं दुखी रहते हैं, और दूसरों का तनाव बढ़ाकर उन्हें भी दुखी करते रहते हैं। कृपया ऐसा न करें।"* मनुष्य जीवन बहुत छोटा है। बहुत कठिनाई से मिला है। इसे व्यर्थ की बातों में नष्ट न करें। *"बल्कि इसका पूरा लाभ उठाएं। पॉजिटिव बातें करें, उत्साहवर्धक बातें करें। देश दुनिया में जो कुछ अच्छा हो रहा है, उसकी चर्चा करें। परिवार और समाज को अच्छा बनाने की कोशिश करें। इससे आप और दूसरे लोग भी प्रसन्न रहेंगे।"* *"प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ अच्छाई होती है। उसकी चर्चा करें, और उसे अपने अंदर धारण करने का प्रयास करें। और उसमें जो कुछ बुराई हो कमी हो, उसकी चर्चा न करें। उसकी उपेक्षा करें।" "जिस व्यक्ति में अच्छाई कम और बुराइयां बहुत अधिक हों, उसकी तो चर्चा बिल्कुल ही न करें।" "अन्यथा इन बुराइयों की चर्चा में ही आपका सारा जीवन चला जाएगा। आप अपना तथा दूसरों का निर्माण कुछ भी नहीं कर पाएंगे। आप अपने लिए ही पुण्य नहीं कमा पाएंगे। और पुण्य न कमा पाने के कारण आपका ही भविष्य खराब हो जाएगा।"* *"अतः दूसरों में अच्छाई देखें और उसे सीखें। बुराईयों को छोड़ देवें। उनकी चर्चा ही न करें।"* यह संकल्प लेवें, कि *"न हम किसी की निंदा करेंगे, और न सुनेंगे."* आपका कल्याण हो जाएगा। *"यह मनुष्य जीवन को जीने का सही तरीका है। जो लोग इस प्रकार से अपना जीवन जीते हैं, वही सदा आनंद में रहते हैं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!