
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
155 days ago
卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐 🌞दिनांक - 28 मार्च 2026 ⛅दिन - शनिवार ⛅विक्रम संवत् - 2083 ⛅अयन - उत्तरायण ⛅ऋतु - वसंत ⛅मास - चैत्र ⛅पक्ष - शुक्ल ⛅तिथि - दशमी सुबह 08:45 तक तत्पश्चात् एकादशी ⛅नक्षत्र - पुष्य दोपहर 02:50 तक तत्पश्चात् अश्लेशा ⛅योग - सुकर्मा रात्रि 08:06 तक तत्पश्चात् धृति ⛅राहुकाल - सुबह 09:28 से सुबह 11:00 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅सूर्योदय - 06:23 ⛅सूर्यास्त - 06:41 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में ⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:50 से प्रातः 05:37 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:08 से दोपहर 12:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:08 से मध्यरात्रि 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 🌥️व्रत पर्व विवरण - रवि योग, भद्रा 🌥️विशेष - एकादशी शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹एकादशी व्रत के लाभ🔹 🔸 एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । 🔸 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । 🔸 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । 🔸 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है । 🔸 परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है । 🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹 🔸1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें । 🔸2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें । 🔸हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है । राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।। एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l 🔸3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए । 🔸4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें । 🔸5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है । 🔸6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) - इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) - इनका सेवन न करें । 🔸7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए । 🔸8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए । 🔸9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए । 🔸10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है । 🔸11. इस दिन बाल नहीं कटायें । 🔸12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें । 🔸13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) । 🔸14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है । ▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬ 🚩जय श्री राम🚩 🚩धर्मो रक्षति रक्षितः 🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत

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