
SHREE SHARMA
424 days ago
गाइये गनपति जगबंदन। संकर-सुवन भवानी-नंदन॥ सिद्धि-सदन, गज-बदन, बिनायक। कृपा-सिंधु, सुंदर, सब-लायक॥ मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता। बिद्या-बारिधि, बुद्धि-बिधाता॥ माँगत तुलसिदास कर जोरे। बसहिं रामसिय मानस मोरे॥ संपूर्ण जगत् के वंदनीय, गुणों के स्वामी श्री गणेश जी का गुणगान कीजिए, जो शिव-पार्वती के पुत्र और उनको प्रसन्न करने वाले हैं। जो सिद्धियों के स्थान हैं, जिनका हाथी का-सा मुख है, जो समस्त विघ्नों के नायक हैं यानी विघ्नों को हटाने वाले हैं, कृपा के समुद्र हैं, सुंदर है, सब प्रकार से योग्य हैं। जिन्हें लड्डू बहुत प्रिय है, जो आनंद और कल्याण को देने वाले हैं, विद्या के अथाह सागर हैं, बुद्धि के विधाता हैं। श्री गणेश से यह तुलसीदास हाथ जोड़कर केवल यही वर माँगता है कि मन मंदिर में श्री सीता राम जी सदा निवास करें.. श्री गणेशाय नमः 🙏🙏

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
