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**सावन पूर्णिमा व्रत का महत्व और पूजा विधि** सावन पूर्णिमा (श्रावणी पूर्णिमा) का दिन अत्यंत पावन माना जाता है। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाता है और भगवान शिव, भगवान विष्णु तथा चंद्र देव की विशेष आराधना की जाती है। **पूजा विधि व नियम** * **प्रातः स्नान व संकल्प:** सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत व पूजा का संकल्प लें। * **शिव पूजन:** शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और भस्म अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। * **भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा:** पंचामृत से अभिषेक कर पीले फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। सत्यनारायण कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। * **जनेऊ धारण (श्रावणी उपाकर्म):** ब्राह्मण और द्विज परंपरा में इस दिन पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलकर नया जनेऊ धारण किया जाता है। * **चंद्र अर्घ्य:** शाम को चंद्रोदय के समय कच्चे दूध और जल से चंद्र देव को अर्घ्य दें। * **फलाहार:** दिनभर फलाहार व्रत रखकर रात्रि में पूजा और अर्घ्य के बाद सात्विक भोजन या फलाहार ग्रहण करें। **दान-पुण्य** * इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या जल का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

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