MyMandirInstall

*📜 चिपको आंदोलन दिवस – 26 मार्च 📜* *1974 – उत्तराखंड के लाता गाँव, हेन्वाल घाटी, गढ़वाल हिमालय में गौरा देवी के नेतृत्व में 27 महिलाओं के समूह ने पेड़ों को बचाने के लिए उन्हें घेरकर चिपको आंदोलन की शुरुआत की। यह पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत के सबसे प्रभावी आंदोलनों में से एक बना।* 26 मार्च 1974 को, उत्तराखंड के चमोली जिले में रेणी गाँव की महिलाओं ने पेड़ों को बचाने के लिए उन्हें गले लगाकर चिपको आंदोलन की शुरुआत की, जो भारत के पर्यावरण इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है. *चिपको आंदोलन का अर्थ:* "चिपके रहना" या "गले लगाना". *आंदोलन की शुरुआत:* 1973 में, उत्तराखंड के चमोली जिले में पेड़ों की कटाई के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ. *अहिंसक विरोध:* महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर उन्हें काटने से रोकने का प्रयास किया, जो कि अहिंसक पर्यावरण सक्रियता का प्रतीक है. *गौरा देवी का नेतृत्व:* गौरा देवी के नेतृत्व में 27 महिलाओं ने पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. *आंदोलन का प्रभाव:* चिपको आंदोलन ने वन संरक्षण के लिए एक शक्तिशाली आंदोलन खड़ा किया और भारत और दुनिया भर में पर्यावरण आंदोलनों के लिए प्रेरणा प्रदान की. *आज भी प्रासंगिक:* चिपको आंदोलन की भावना आज भी देश में पर्यावरण संघर्षों को संबोधित करने में महत्वपूर्ण है. *अन्य प्रतिभागियों के नाम:* सुरक्षा देवी, बचनी देवी, विरुष्का देवी, सुदेशा देवी, और कई अन्य. *परिणाम:* सरकार ने तीन स्थानों पर वनों की कटाई तत्काल रोक दी और हिमालय के वनों को संरक्षित वन घोषित करने के प्रश्न पर उन्हें बातचीत करने का न्योता दिया. *महिलाओं की भूमिका:* महिलाओं ने वनों के प्रबंधन में अपनी भागीदारी की मांग की, क्योंकि वे ईंधन, चारे, पानी आदि को एकत्रित करती हैं.

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!