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रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, लेकिन समय रहते लक्षणों की पहचान और सही सावधानी से इससे बचा जा सकता है। यहाँ पागल या रेबीज से संक्रमित कुत्ते की पहचान और बचाव के मुख्य तरीके दिए गए हैं: रेबीज संक्रमित कुत्ते की पहचान संक्रमित कुत्ते के व्यवहार में अचानक बदलाव आता है, जिसे दो श्रेणियों में देखा जा सकता है: * अत्यधिक आक्रामक व्यवहार: कुत्ता बिना किसी उकसावे के हर चलती वस्तु, इंसान या बेजान चीज़ों पर हमला करने लगता है। * असामान्य शांति (Dumb Rabies): कुत्ता सुस्त होकर अंधेरे कोनों में छिपने लगता है और काटने की कोशिश करता है। * मुँह से झाग निकलना: गले की मांसपेशियों में लकवा मारने के कारण कुत्ता अपनी लार नहीं निगल पाता, जिससे मुँह से झाग गिरने लगता है। * आवाज में बदलाव: भौंकने की आवाज भारी या डरावनी हो जाती है। * पानी से डर (Hydrophobia): रेबीज का सबसे बड़ा लक्षण है पानी देखकर डरना या पानी पीने में असमर्थ होना। * अजीब चीजें खाना: कुत्ता पत्थर, लकड़ी या कूड़ा-करकट चबाने की कोशिश कर सकता है। बचाव के उपाय अगर आपको आसपास कोई ऐसा कुत्ता दिखे या दुर्घटनावश कोई कुत्ता काट ले, तो ये कदम उठाएं: * दूरी बनाए रखें: संदिग्ध कुत्ते की आँखों में सीधे न देखें और उसके पास जाने या उसे छूने की कोशिश न करें। * घाव को तुरंत धोएं: यदि कुत्ता काट ले या खरोंच मार दे, तो उस जगह को तुरंत बहते पानी और साबुन (Lifebuoy या Detol जैसा क्षारीय साबुन बेहतर है) से कम से कम 10-15 मिनट तक धोएं। यह वायरस के असर को काफी हद तक कम कर देता है। * एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV): बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं और वैक्सीन का कोर्स शुरू करें। रेबीज का इलाज केवल बचाव (Vaccination) है, लक्षण दिखने के बाद यह जानलेवा होता है। * पट्टी न बांधें: कुत्ते के काटे हुए घाव को खुला छोड़ दें, उस पर पट्टी या टांके लगवाने से बचें (जब तक बहुत जरूरी न हो)। * पालतू जानवरों का टीकाकरण: अपने आसपास के या पालतू कुत्तों का समय पर टीकाकरण (Vaccination) जरूर करवाएं। सामाजिक जिम्मेदारी यदि आप अपने क्षेत्र में किसी कुत्ते में ऐसे लक्षण देखते हैं, तो तुरंत स्थानीय नगर निगम या पशु कल्याण संस्था को सूचित करें ताकि दूसरों को सुरक्षित रखा जा सके।

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