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सन् 1928 भारत के ऑटोमोबाइल इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण साल था, क्योंकि इसी वर्ष **भारत का सबसे पहला फ्यूल स्टेशन (पेट्रोल पंप)** स्थापित किया गया था। यहाँ उस ऐतिहासिक पेट्रोल पंप की कुछ मुख्य खूबियां और जानकारी दी गई हैं: ### 1. स्थान और स्थापना * यह भारत का पहला आधिकारिक पेट्रोल स्टेशन था जिसे **कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता)** के **'हैरीसन रोड'** (जिसे अब महात्मा गांधी रोड कहा जाता है) पर खोला गया था। ### 2. मैन्युअल तकनीक (Manual Pump) * आज के समय की तरह उस वक्त पंप डिजिटल या बिजली से चलने वाले नहीं थे। उस समय **'हैंड पंप'** तकनीक का इस्तेमाल होता था। एक लीवर को हाथ से घुमाकर या दबाकर पेट्रोल को स्टोर टैंक से निकालकर गाड़ी की टंकी में भरा जाता था। ### 3. पंप का डिज़ाइन * शुरुआती दौर में ये पेट्रोल पंप आधुनिक स्टेशनों जैसे बड़े नहीं होते थे। ये अक्सर सड़क के किनारे एक **लोहे के खंभे (Pillar)** के रूप में होते थे, जिसके ऊपर एक कांच का जार (Globe) लगा होता था। इस जार पर तेल कंपनी का लोगो बना होता था और रात में इसमें रोशनी जलती थी। ### 4. वितरण प्रणाली (Gravity Feed) * उस समय 'विजिबल पंप' (Visible Pumps) का इस्तेमाल होता था। पहले पेट्रोल को ऊपर लगे एक कांच के सिलेंडर में भरा जाता था ताकि ग्राहक देख सके कि तेल साफ है। फिर गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की मदद से पाइप के जरिए उसे कार में डाला जाता था। ### 5. कंपनी का नाम * इस ऐतिहासिक पंप की शुरुआत **बर्मा शेल (Burmah Shell)** कंपनी द्वारा की गई थी, जिसे आज हम **भारत पेट्रोलियम (BPCL)** के नाम से जानते हैं। **एक रोचक तथ्य:** 1928 से पहले भारत में पेट्रोल किसी स्टेशन पर नहीं मिलता था। उस समय लोग पेट्रोल को मिट्टी के तेल (Kerosene) की तरह **टीन के डिब्बों** में खरीदकर अपने पास रखते थे और जरूरत पड़ने पर फनल (कीप) की मदद से खुद गाड़ी में डालते थे। 1928 में इस पंप के खुलने से वाहन मालिकों को बहुत बड़ी सुविधा मिली थी।

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