
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
33 days ago
*योगविज्ञान शृंखला - 45* *विषय: शिव और शक्ति का संतुलन* 🙏🏻 _इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना में प्रवाहित जीवन ऊर्जा_ *योग का सार = शरीर की नाड़ियों का संतुलन, मन की स्पष्टता और आत्मा की शांति* *1. शिव और शक्ति - दो ध्रुव, एक ही सत्य* **शक्ति** **शिव** **स्वभाव** सृजन, ऊर्जा, प्रकृति, गतिशीलता चेतना, स्थिरता, साक्षीभाव, शांति **गुण** सृजनात्मकता, करुणा, अंतर्दृष्टि, प्रेरणा, परिवर्तन, विकास, ऊर्जा, अभिव्यक्ति साक्षीभाव, स्थिरता-धैर्य, विवेक-स्पष्टता, शांति-समत्व, आत्मबोध-मुक्ति **सार** **शक्ति वह ऊर्जा है, जो सृजन करती है, चलाती है, विस्तारित करती है** **शिव वह चेतना है, जो देखती है, सहती है, समाहित और शांत रहती है** सरल भाषा में: शक्ति = Battery और शिव = Switch। ऊर्जा बिना चेतना के बिखर जाती है, और चेतना बिना ऊर्जा के निष्क्रिय रह जाती है। *2. शरीर की 3 मुख्य नाड़ियां - इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना* हमारे शरीर में 72,000 नाड़ियां हैं, पर 3 सबसे महत्वपूर्ण हैं: *A. इड़ा नाड़ी* - *स्वरूप*: चंद्र स्वरूप, शीतल प्रवाह - *स्थान*: बाईं ओर से संबंधित - *काम*: चंद्र ऊर्जा का प्रवाह, शांति, शीतलता, अंतर्मुखता, मानसिक स्थिरता, संवेदनशीलता - *जब प्रबल हो*: शांति, शीतलता और अंतर्दृष्टि बढ़ती है - *संबंध*: शक्ति का ग्रहणशील, रचनात्मक पहलू *B. पिंगला नाड़ी* - *स्वरूप*: सूर्य स्वरूप, ऊर्जावान प्रवाह - *स्थान*: दाईं ओर से संबंध - *काम*: सूर्य ऊर्जा का प्रवाह, क्रियाशीलता, उत्साह, सक्रियता, बाह्यमुखता, प्रेरणा, कर्मशक्ति - *जब प्रबल हो*: ऊर्जा, साहस और क्रिया बढ़ती है - *संबंध*: शक्ति का सक्रिय, व्यक्त करने वाला पहलू *C. सुषुम्ना नाड़ी* - *स्वरूप*: संतुलन का केंद्रीय मार्ग - *स्थान*: रीढ़ की हड्डी के बीच में - *काम*: इड़ा और पिंगला का संतुलन यहीं होता है। यह आध्यात्मिक विकास, ध्यान, समन्वय और आत्मबोध का मार्ग है। - *योग में*: जब सुषुम्ना में प्रवाह होता है तभी वास्तविक योग-साधना में आंतरिक उन्नति होती है *3. संतुलन कैसे बनता है?* *"जब शिव (चेतना) और शक्ति (ऊर्जा) में संतुलन होता है, तब इड़ा और पिंगला सुषुम्ना में प्रवाहित होकर शरीर, मन और आत्मा में पूर्ण सामंजस्य स्थापित करते हैं।"* यानी जब हम बहुत ज्यादा सोचते हैं = इड़ा ज्यादा। जब बहुत ज्यादा काम-भागदौड़ करते हैं = पिंगला ज्यादा। योग, प्राणायाम, ध्यान से दोनों को बैलेंस करके सुषुम्ना को जगाया जाता है। *4. शास्त्र संदर्भ* *“त्रिवेणी-सङ्गमं धत्ते...”* *— हठयोगप्रदीपिका 3.24* अर्थ: इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना के संगम को योग परंपरा में त्रिवेणी-संगम की उपमा दी गई है। जैसे प्रयाग में 3 नदियों का संगम है, वैसे ही शरीर में इन 3 नाड़ियों का संगम योग की कुंजी है। *5. गूढ़ अर्थ* बीच में जो अर्ध-नारीश्वर जैसी आकृति है: - एक तरफ नारंगी रंग = शक्ति, सूर्य, पिंगला - दूसरी तरफ नीला रंग = शिव, चंद्र, इड़ा - बीच में जलती हुई ज्योति = सुषुम्ना, जहाँ दोनों मिलते हैं *संक्षेप में सीख* 1. *शक्ति के बिना* शिव शव है - कुछ कर नहीं सकता 2. *शिव के बिना* शक्ति अंधी है - दिशा नहीं है 3. *योग का लक्ष्य* इड़ा-पिंगला को शांत करके सुषुम्ना को जगाना है। तभी मन शांत और जीवन संतुलित होता है। *नाड़ी शोधन प्राणायाम / अनुलोम-विलोम* इड़ा और पिंगला को बैलेंस करने की सबसे सरल और शक्तिशाली विधि है। 5 मिनट में मन शांत और ऊर्जा संतुलित हो जाती है। *करने की विधि - स्टेप बाय स्टेप* 1. *बैठक* सुखासन या पद्मासन में रीढ़ सीधी करके बैठ जाएं। चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। 2. *हाथ की मुद्रा - नासिका मुद्रा* दाएं हाथ के अंगूठे से दायां नथुना, अनामिका + छोटी उंगली से बायां नथुना बंद करें। बीच की दो उंगलियां माथे पर रखें। 3. *चक्र* - *पहला राउंड*: बाएं नथुने से सांस अंदर लें → 4 गिनती - सांस रोकें → 4 गिनती - दाएं नथुने से सांस बाहर छोड़ें → 8 गिनती - *दूसरा राउंड*: दाएं नथुने से सांस अंदर लें → 4 गिनती - सांस रोकें → 4 गिनती - बाएं नथुने से सांस बाहर छोड़ें → 8 गिनती यही 1 चक्र हुआ। ऐसे 5-9 चक्र करें। *3 जरूरी नियम* 1. *समय*: सुबह खाली पेट या शाम को 4-6 बजे। खाने के 3 घंटे बाद करें। 2. *सांस*: हमेशा नाक से ही लें। आवाज न आए, धीमी और गहरी हो। 3. *अनुपात*: शुरुआती लोग 1:1:2 का अनुपात रखें। यानी जितना अंदर उतनी देर रोकें, बाहर छोड़ने में दोगुना समय। *फायदे - शिव-शक्ति संतुलन के लिए* - *पिंगला शांत होती है*: गुस्सा, बेचैनी, ज्यादा सोच कम होती है - *इड़ा बैलेंस होती है*: सुस्ती, उदासी दूर होती है - *सुषुम्ना जागती है*: ध्यान गहरा लगता है, निर्णय क्षमता बढ़ती है - *फायदे*: BP नॉर्मल, नींद अच्छी, दिमाग की एकाग्रता, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है *कब न

Comments (1)

R k jangid phulera Jaipur
Jul 28, 2026
जय हो शिव शक्ति की 🙏
