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SHREE SHARMA

76 days ago

माता कुन्ती भगवान श्रीकृष्ण से कहती हैं—" मन्ये त्वां कालमीशानमनादिनिधनं विभुम् । समं चरन्तं सर्वत्र भूतानां यन्मिथः कलिः ॥ "हे प्रभु! आप अनादि हैं, अनन्त हैं, समस्त सृष्टि के नियन्ता हैं। आप सबके हृदय में समान रूप से विराजमान हैं। आपके लिए न कोई अपना है, न पराया।" संसार कहता है— "कृष्ण पाण्डवों के पक्ष में थे।" लेकिन माता कुन्ती कहती हैं— "नहीं! कृष्ण किसी पक्ष में नहीं थे। कृष्ण तो सबके थे।" सूर्य जब उदय होता है तो वह यह नहीं देखता कि कौन सज्जन है और कौन दुर्जन। उसकी किरणें सब पर समान रूप से पड़ती हैं। किन्तु यदि कोई व्यक्ति अपने घर के दरवाजे बन्द कर ले, तो दोष सूर्य का नहीं है। ठीक वैसे ही भगवान की कृपा भी सब पर समान रूप से बरसती है। परन्तु कोई अपना हृदय खोल देता है, और कोई अहंकार की दीवारें खड़ी कर लेता है। दुर्योधन को भी वही कृष्ण मिले थे जो अर्जुन को मिले थे। किन्तु अर्जुन ने कहा— "शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्।" और दुर्योधन ने कहा— "मैं स्वयं पर्याप्त हूँ।" भगवान ने किसी के साथ पक्षपात नहीं किया; अन्तर केवल हृदय के भाव का था।

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Comments (6)

Annu

Annu

Jun 16, 2026

Jai Shri Krishna

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Jun 15, 2026

Jai shree krishna 🪈🦚🌹🙏

बरखा शर्मा

बरखा शर्मा

Jun 15, 2026

🌺🌺RADHE RADHE JI 🌺🌹🌺SHUBH RATRI JI🌺🌺

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 15, 2026

जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ संध्या वंदन जी 🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 15, 2026

माता कुन्ती भगवान श्रीकृष्ण से कहती हैं—" मन्ये त्वां कालमीशानमनादिनिधनं विभुम् । समं चरन्तं सर्वत्र भूतानां यन्मिथः कलिः ॥ "हे प्रभु! आप अनादि हैं, अनन्त हैं, समस्त सृष्टि के नियन्ता हैं। आप सबके हृदय में समान रूप से विराजमान हैं। आपके लिए न कोई अपना है, न पराया।" संसार कहता है— "कृष्ण पाण्डवों के पक्ष में थे।" लेकिन माता कुन्ती कहती हैं— "नहीं! कृष्ण किसी पक्ष में नहीं थे। कृष्ण तो सबके थे।" सूर्य जब उदय होता है तो वह यह नहीं देखता कि कौन सज्जन है और कौन दुर्जन। उसकी किरणें सब पर समान रूप से पड़ती हैं। किन्तु यदि कोई व्यक्ति अपने घर के दरवाजे बन्द कर ले, तो दोष सूर्य का नहीं है। ठीक वैसे ही भगवान की कृपा भी सब पर समान रूप से बरसती है। परन्तु कोई अपना हृदय खोल देता है, और कोई अहंकार की दीवारें खड़ी कर लेता है। दुर्योधन को भी वही कृष्ण मिले थे जो अर्जुन को मिले थे। किन्तु अर्जुन ने कहा— "शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्।" और दुर्योधन ने कहा— "मैं स्वयं पर्याप्त हूँ।" भगवान ने किसी के साथ पक्षपात नहीं किया; अन्तर केवल हृदय के भाव का था।