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### 1. केंद्रीय और मुख्य विग्रह (Center & Base) * **भगवान श्री विष्णु/श्री कृष्ण:** वृक्ष के ठीक नीचे, जड़ के पास केंद्र में भगवान विष्णु (या श्री कृष्ण के रूप में) ध्यान की मुद्रा में विराजमान हैं। वे इस पूरे ब्रह्मांड और दैवीय वृक्ष के मूल आधार प्रतीत हो रहे हैं। * **ध्यानमग्न संत:** उनके ठीक सामने और नीचे दोनों तरफ श्वेत वस्त्र और पगड़ी पहने छह महान संत या आचार्य नदी के किनारे गहरे ध्यान में बैठे हैं। ### 2. वृक्ष का तना और मध्य भाग (The Trunk) तना ऊपर की ओर बढ़ते हुए विभिन्न स्तरों (Levels) में बंटा है, जहाँ अलग-अलग दिव्य रूप दिखाई दे रहे हैं: * **प्रथम स्तर:** भगवान विष्णु के ठीक ऊपर एक और तेजस्वी दिव्य रूप (शायद श्री राम या नारायण रूप) विराजमान हैं। उनके दोनों तरफ ऋषि-मुनि बैठे हैं। * **द्वितीय स्तर:** इसके ऊपर देवियों और देवताओं के विभिन्न सुंदर स्वरूप जैसे माता लक्ष्मी, माता पार्वती और अन्य देवियाँ ध्यानस्थ हैं। * **तृतीय स्तर:** यहाँ मध्य में एक और प्रमुख देवता और उनके आस-पास ऋषियों के रूप दिखाई दे रहे हैं। ### 3. वृक्ष का शीर्ष भाग (The Canopy/Top) वृक्ष की सबसे ऊंची शाखाओं पर मुख्य देवताओं का निवास दिखाया गया है: * **सबसे ऊपर केंद्र में:** माता लक्ष्मी या साक्षात आदिशक्ति महालक्ष्मी विराजमान हैं। * **बाईं ओर (Left Top):** भगवान श्री विष्णु और उनके पास देवर्षि नारद जैसी आकृति है। * **दाईं ओर (Right Top):** माता सरस्वती (वीणा के साथ) और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी विराजमान हैं। ### 4. भव्य पृष्ठभूमि और प्राकृतिक सौंदर्य (Background) * **पवित्र नदियाँ और झरने:** वृक्ष के पीछे से सुंदर जलप्रपात (Waterfalls) बह रहे हैं, जो एक पावन नदी में मिल रहे हैं। जल में सुंदर कमल के फूल खिले हैं और छोटे दीपक (दीये) तैर रहे हैं। * **हिमालय की चोटियाँ:** पृष्ठभूमि में सूर्योदय या सूर्यास्त की अलौकिक आभा के साथ बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ (हिमालय) दिखाई दे रहे हैं। * **आश्रम/मंदिर:** नदी के किनारों पर प्राचीन शैली के सुंदर मंदिर या ऋषियों के आश्रम बने हुए हैं। ### 5. विशेष लिखावट नीचे दाईं ओर कोने में बड़े अक्षरों में **"आस्तिक"** लिखा हुआ है, जो ईश्वर और धर्म में गहरी आस्था रखने वाले को दर्शाता है।

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