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जय श्री राम! जय पवनसुत हनुमान! आज **शनिवार, 18 अप्रैल 2026** के इस पावन अवसर पर, अयोध्या धाम स्थित **हनुमानगढ़ी** से प्रभु श्री हनुमान जी महाराज की दिव्य आरती और मंगल गान का स्मरण करना ही परम सौभाग्य है। ## **हनुमानगढ़ी की दिव्य आरती: भावार्थ** अयोध्या के अधिपति, संकटमोचन श्री हनुमान जी की आरती केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच का एक जीवंत सेतु है। जब हनुमानगढ़ी में शंखनाद और नगाड़ों की गूंज के बीच कर्पूर गौरम की खुशबू फैलती है, तो वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो जाता है। > **"आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥"** > ### **आज के दर्शन का विशेष महत्व** * **शनिवार का संयोग:** शनिवार का दिन बजरंगबली को समर्पित है। आज के दिन हनुमानगढ़ी के दर्शन और आरती का श्रवण करने से शनि दोष से मुक्ति और साहस की प्राप्ति होती है। * **अयोध्या की दिव्यता:** प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण के बाद हनुमानगढ़ी की आभा और भी अलौकिक हो गई है, क्योंकि हनुमान जी यहाँ 'कोतवाल' के रूप में विराजमान होकर भक्तों की रक्षा करते हैं। ### **हनुमान जी के चरणों में प्रार्थना** * **सुख-समृद्धि:** प्रभु आपके जीवन के सभी संकटों को दूर करें। * **बल और बुद्धि:** आपको 'अष्ट सिद्धि और नौ निधि' के दाता का आशीर्वाद प्राप्त हो। * **शांति:** आपके परिवार में सुख और शांति का वास हो। ### **हनुमान चालीसा की सिद्ध पंक्तियाँ** *"संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥"* *"नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥"* **सियावर रामचंद्र की जय! पवनसुत हनुमान की जय!**

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