
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
1 day ago
*क्या पुरी जगन्नाथ मंदिर का 'ब्रह्म पदार्थ' सच में श्रीकृष्ण का हृदय है? शास्त्र और पुराण क्या कहते हैं?* *……………..* *भगवान श्रीकृष्ण का महाप्रयाण, पुरी के 'ब्रह्म पदार्थ' का रहस्य और स्कंद पुराण का सत्य : इतिहास, पुराण और अगाध आस्था का एक दिव्य संस्मरण! 👇* *सनातन संस्कृति में कुछ कथाएँ केवल ग्रंथों के पन्ने नहीं होतीं, वे हमारी आत्मा का हिस्सा होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी लोक से प्रस्थान और पुरी के श्री जगन्नाथ धाम से जुड़ी महागाथा कुछ ऐसी ही है — जहाँ ग्रंथों की वाणी, पुराणों के प्रसंग और भक्तों की अनन्य भावनाएँ एक-दूसरे में घुल-मिल जाती हैं।* *आइए, इस पूरी कथा को अत्यंत स्पष्ट और भावपूर्ण दृष्टि से समझें :✔️* *श्रीकृष्ण का महाप्रयाण : मौसल पर्व का ग्रंथ-सम्मत प्रसंग👇* *महाभारत के 'मौसल पर्व' में वह अत्यंत मर्मस्पर्शी प्रसंग आता है, जब अपने ही कुल के विनाश का दुःख देख भगवान श्रीकृष्ण प्रभास क्षेत्र में एक पीपल वृक्ष के नीचे योगमुद्रा में विश्राम कर रहे थे।* *उनके श्रीअंगों की दिव्य कांति और लाल तलवा दूर से हिरण के अंग जैसा भ्रम उत्पन्न कर रहा था। तभी 'जरा' नामक बहेलिए ने भूलवश बाण चला दिया, जो सीधे प्रभु के चरण में जाकर लगा।* *जब बहेलिया समीप पहुँचा और उसने जगत के पालनहार को देखा, तो उसका हृदय काँप उठा। वह फूट-फूटकर रोने लगा और क्षमा माँगने लगा।* *तब भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कराते हुए उसे सांत्वना दी और अपने नित्य धाम प्रस्थान कर गए।* *(यह प्रसंग ग्रंथ-सम्मत है। हालाँकि बहेलिए का पूर्वजन्म में 'बालि' होना मूल महाभारत का भाग नहीं है, बल्कि बाद की लोक-कथाओं और कथा-साहित्य का सुंदर विस्तार है।)* *'दारु-ब्रह्म' और राजा इंद्रद्युम्न : स्कंद पुराण का वास्तविक संदर्भ👇* *लोक-कथाओं में यह प्रचलित है कि देहत्याग के बाद श्रीकृष्ण का हृदय (अदाह्य पिंड) नहीं जला और वह समुद्र में तैरता हुआ पुरी पहुँचा।* *शास्त्र क्या कहता है? ग्रंथों की ओर देखें तो स्कंद पुराण के 'पुरुषोत्तम-क्षेत्र माहात्म्य' में राजा इंद्रद्युम्न और 'दारु' (दिव्य काष्ठ) के प्राकट्य की अत्यंत सुंदर कथा मिलती है।* *पुराण के अनुसार भगवान ने राजा इंद्रद्युम्न को स्वप्न में आदेश दिया था कि समुद्र तट पर उन्हें एक अलौकिक 'दारु' प्राप्त होगा, जिससे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के विग्रहों का निर्माण होगा।* *महत्त्वपूर्ण तथ्य : स्कंद पुराण में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि वह दारु भगवान की इच्छा से प्रकट हुआ था, किंतु उसमें कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि वह काष्ठ सीधे तौर पर श्रीकृष्ण का भौतिक हृदय अथवा न जलने वाला मांस-पिंड है। लोक-आस्था और अगाध प्रेम ने कालांतर में इस दारु-रूप को भगवान श्रीकृष्ण के अविनाशी तत्त्व से जोड़कर इसे और अधिक पावन बना दिया।* *'ब्रह्म पदार्थ' और नवकलेवर का अलौकिक रहस्य👇* *ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में प्रति कुछ वर्षों में होने वाली 'नवकलेवर' (विग्रह-परिवर्तन) की परंपरा आज भी उतनी ही रहस्यमयी और जीवंत है।* *जब पुराने विग्रहों को बदलकर नए विग्रह स्थापित किए जाते हैं, तब मध्यरात्रि में अत्यंत गोपनीय अनुष्ठान के अंतर्गत एक विशेष तत्त्व — जिसे 'ब्रह्म पदार्थ' कहा जाता है — पुराने विग्रह से निकालकर नए विग्रह में स्थापित किया जाता है, ऐसा कहा जाता है।* *इस ब्रह्म पदार्थ का वास्तविक स्वरूप क्या है, इसका प्रत्यक्ष ज्ञान आज भी साधारण जनों को नहीं है। यही रहस्य इस धाम को विश्वभर में अद्वितीय बनाता है।* *निष्कर्ष :* *श्रीकृष्ण का देहत्याग महाभारत का ग्रंथ-सम्मत प्रसंग है। राजा इंद्रद्युम्न द्वारा दिव्य 'दारु' की प्राप्ति स्कंद पुराण में वर्णित है। और उस दारु को श्रीकृष्ण के अविनाशी तत्त्व के रूप में देखना हमारी लोक-आस्था की परम पराकाष्ठा है।* *ग्रंथ हमें आधार देते हैं, पुराण हमें दिशा देते हैं, और आस्था हमें उन्हें जीने की शक्ति देती है।* *संक्षेप में कहें तो, आस्था और लोक-संस्कृति के धरातल पर यह बात शत-प्रतिशत प्रामाणिक और सर्वमान्य है।* *स्रोत: महाभारत मौसल पर्व, श्रीमद्भागवत, स्कंद पुराण - पुरुषोत्तम क्षेत्र माहात्म्य। ब्रह्म पदार्थ से जुड़ी मान्यता पुरी मंदिर की लोक-परंपरा पर आधारित है।* *मंगल कामनाओं के साथ आप सभी का दिन शुभ हो।* *जयति जयति जय पुण्य सनातन संस्कृति* *जयति जयति जय पुण्य भारतभूमि* *जय जय श्री कृष्णा* *जय श्री जगन्नाथ🙏*

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