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जी हाँ, यह भारतीय दर्शन और पुराणों (विशेषकर गरुड़ पुराण) की एक बहुत ही गहरी और प्रचलित मान्यता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, आत्मा को मनुष्य का तन पाने से पहले 84 लाख योनियों (विभिन्न प्रकार के जन्मों) के चक्र से गुजरना पड़ता है। इसे ही 'चक्रव्यूह' या 'संसार चक्र' कहा जाता है। यहाँ इसका एक संक्षिप्त विभाजन दिया गया है कि ये 84 लाख योनि कौन-कौन सी मानी जाती हैं: योनियों का वर्गीकरण: * 9 लाख: जलचर (पानी में रहने वाले जीव) * 20 लाख: स्थावर (अचल जीव जैसे पेड़-पौधे) * 11 लाख: कृमि-कीट (कीड़े-मकौड़े और सरीसृप) * 10 लाख: पक्षी (नभचर) * 30 लाख: पशु (थलचर) * 4 लाख: मानव (मानव योनि) इस मान्यता के पीछे का संदेश: * दुर्लभ मानव जीवन: हिंदू धर्म में माना जाता है कि 'बड़े भाग्य मानुष तन पावा'। यानी, इतने लंबे सफर के बाद मनुष्य का जन्म मिलता है, इसलिए इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। * कर्म का सिद्धांत: मनुष्य योनि को 'कर्म योनि' कहा गया है, जहाँ हम अपने कर्मों से तय करते हैं कि हमें मोक्ष (जन्म-मरण से मुक्ति) मिलेगा या फिर से इस चक्र में लौटना पड़ेगा। * विकास का क्रम: आधुनिक विज्ञान के 'इवोल्यूशन' (विकासवाद) से अगर इसकी तुलना करें, तो यह काफी मिलता-जुलता है—एक कोशिकीय जीव से लेकर चेतना के उच्चतम स्तर (मानव) तक का सफर। > एक रोचक बात: आध्यात्मिक गुरु कहते हैं कि "84 लाख बार जन्म लेने" का मतलब यह भी है कि मानव शरीर पाने तक हमारी चेतना ने हर तरह के अनुभव और संघर्ष को जिया है। >

Comments (2)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 1, 2026

शुभरात्रि जी बेहन जी

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Mar 1, 2026

ॐ भास्कराय नमः 🙏 आरोग्य प्रदान करने वाले भगवान भास्कर आपके जीवन में सदैव उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाली ,समृद्धि और सफलता की चमक बनाए रखें 🙏 आप सदैव स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों के साथ हँसते मुस्कुराते रहें 🙏 इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम भाई जी 🙏🌹☺️