
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
30 days ago
*⏳ मृत्यु के समय भगवान के हाथ में जो थैला होता है, उसमें क्या होता है? धन, परिवार या हमारा शरीर?* ✨ कब तय होता है मृत्यु का समय और क्या जाता है हमारे साथ? ✨ (भाग - २) मृत्यु एक अटल सत्य है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अंत समय में हमारे साथ क्या जाता है? 👜 भगवान के हाथ का वह थैला: मृत्यु के बाद जब मानव की भगवान से मुलाकात होती है, तो मानव मोह माया में पड़कर वापस लौटना चाहता है। वह भगवान के हाथ में एक थैला देखकर पूछता है, "क्या इसमें मेरी धन-दौलत या परिवार है?" भगवान कहते हैं, "नहीं, वे तो समय के साथ विलीन हो गए।" मानव पूछता है, "क्या इसमें मेरा शरीर है?" भगवान मुस्कुराते हैं, "शरीर तो मिट्टी था, मिट्टी में मिल गया।" जब मानव घबराकर वह थैला देखता है, तो उसमें सिर्फ एक ही चीज़ होती है— 'कर्म'! अतः जीवन में अच्छे कर्म ही अंत समय में हमारे साथ जाते हैं। 📜 गरुड़ पुराण: कर्मों के अनुसार कैसी होती है मृत्यु? भगवान श्रीकृष्ण ने गरुड़ पुराण में स्पष्ट बताया है कि: सुखद मृत्यु: जो लोग सच बोलते हैं, ईश्वर में आस्था रखते हैं, किसी को धोखा नहीं देते और अच्छे कर्म करते हैं, उनके प्राण बहुत शांति से निकलते हैं। कष्टदायी मृत्यु: जो लोग झूठ बोलते हैं, धोखा देते हैं, स्वार्थी होते हैं या शास्त्रों की निंदा करते हैं, उनकी मृत्यु बहुत कष्टकारी होती है। यमदूतों को देखकर वे कांपते हैं और बेहद पीड़ा के साथ उनके प्राण निकलते हैं। 👁️ शिव पुराण: मृत्यु के क्या पूर्व संकेत होते हैं? शिव पुराण और योग शास्त्रों में मृत्यु से पहले मिलने वाले कुछ सूक्ष्म संकेतों का वर्णन है: 6 महीने पहले: व्यक्ति को अचानक सब कुछ काला दिखने लगता है। पानी, तेल या शीशे में अपनी परछाई नहीं दिखती या विकृत दिखती है। शारीरिक बदलाव: नाक, कान, जीभ या आंखें पथरा जाना, और अपनी ही नाक की नोक (Tip of the nose) देखने में असमर्थ हो जाना। रंगों का भ्रम: सूर्य या चंद्रमा की रोशनी लाल या काली दिखाई देना। (नोट: योगी जन नाभि चक्र या 'हारा केंद्र' के टूटने से मृत्यु को 9 महीने पहले ही भांप लेते हैं।) 🧘♂️ प्राण किस चक्र से निकलते हैं? योग विज्ञान के अनुसार शरीर में 7 चक्र होते हैं: जो जीवनभर सिर्फ वासनाओं में डूबे रहते हैं, उनके प्राण निचले चक्र (मूलाधार) से निकलते हैं। जो प्रेम और करुणा से भरे होते हैं, उनके प्राण 'हृदय चक्र' से निकलते हैं। जो सिद्ध योगी होते हैं, वे अपनी ऊर्जा को सिर के शीर्ष (सहस्रार चक्र) से छोड़ते हैं, जिससे उन्हें मोक्ष मिलता है। 🙏 मृत्यु से पूर्व क्या करना चाहिए? (अजामिल की कथा) श्रीमद्भागवत में अजामिल की कथा है। उसने जीवन भर पाप किए, लेकिन मृत्यु के समय जब उसे यमदूत लेने आए, तो उसने घबराकर अपने छोटे बेटे को पुकारा— "नारायण... नारायण!" अनजाने में ही सही, भगवान का नाम लेने से विष्णु जी के दूत वहां आ गए और उसे यमदूतों से मुक्त कराकर विष्णु लोक ले गए। 💡 सार: हमेशा अच्छे कर्म करें और अपनी दिनचर्या (कार्य, भोजन, व्यवहार) को पूरे होश (जागरूकता) के साथ जिएं। जो जीवन को सजगता से जीता है, उसकी मृत्यु भी एक उत्सव बन जाती है! ॐ नमः शिवाय🌹🌹🌹🙏

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