
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
243 days ago
30.12.2025 जीवन में सुख और दुख दोनों आते रहते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में दुख अधिक आते हैं, और किसी के जीवन में सुख अधिक आते हैं। *"जिसके जीवन में दुख अधिक आते हैं, वह सुख की कीमत समझता है। और जिसके जीवन में सुख अधिक आते हैं, वह दुख के कम आने से सुख की कीमत भी उतनी नहीं समझता।" "जैसे धनवान सेठों के बच्चे पैसे की कीमत अधिक नहीं समझते। और गरीब लोगों के बच्चे धन की कीमत समझते हैं। क्योंकि उन्हें धन बहुत मुश्किल से मिलता है।"* *"इसी प्रकार से सुख-दुख की भी बात है। जो लोग सदा सुख साधनों में ही अपना जीवन जीते हैं, कभी धूप में नहीं चलते, कभी नंगे पांव नहीं चलते, कभी कोई परिश्रम वाला कार्य नहीं करते, तो आगे चलकर वे सुख की कीमत भी नहीं समझ पाएंगे। उसका आनंद पूरा नहीं ले पाएंगे। क्योंकि उनके जीवन में दुख बहुत कम आया। वे दुख और सुख की तुलना ठीक से नहीं कर पाए।"* *"जीवन का पूरा आनंद लेने के लिए बीच-बीच में कभी-कभी दुख भी आना चाहिए। जैसे छाया की कीमत तभी पता चलती है, जब कभी-कभी धूप में भी पैदल चलना पड़े।"* *"इसी प्रकार से यदि जीवन में कुछ कुछ कष्ट आते रहेंगे, तो व्यक्ति उनसे संघर्ष करेगा। और उसे सुख का सही मूल्य समझ में आएगा। उन दुखों को पार करने के बाद, जो उसे सुख मिलेगा, तब वह उस सुख की कीमत भी समझेगा, और तभी उसका जीवन अधिक सुखमय भी हो पाएगा।"* ----- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़, गुजरात"*

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