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*बार-बार नाभि खिसकना* *पेट दर्द और कमजोरी का आयुर्वेदिक समाधान* नाभि खिसकना या "नाभि टलना" आयुर्वेद में _नाभि च्युत_ कहलाता है। इसमें नाभि अपनी जगह से थोड़ा हट जाती है जिससे पाचन बिगड़ जाता है। *लक्षण:* - पेट दर्द, खासकर नाभि के आसपास - दस्त या कब्ज की समस्या - शरीर में कमजोरी, थकान - भूख कम लगना, गैस बनना *आयुर्वेदिक नाभि सपोर्ट फॉर्मूला:* इस चार्ट के अनुसार चूर्ण बना सकते हैं: सामग्री मात्रा फायदा **अजवाइन** 200g गैस, पेट दर्द में आराम **मेथी** 150g पाचन सुधारे, कब्ज दूर करे **सौंठ** 100g भूख बढ़ाए, सूजन कम करे **काला नमक** 100g पाचन रस बढ़ाए **हींग** 20g गैस और मरोड़ में तुरंत आराम *सेवन विधि:* आधा से 1 चम्मच गुनगुने पानी के साथ खाने के बाद दिन में 2 बार लें। *घरेलू सावधानियां:* 1. *भारी वजन न उठाएं* - ये सबसे बड़ा कारण है नाभि खिसकने का 2. *पेट के बल न सोएं* - पीठ के बल या करवट लेकर सोएं 3. *सरसों तेल मालिश* - नाभि पर हल्के हाथ से गोलाई में मालिश करें 4. *योग* - उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन से नाभि अपनी जगह आती है *जरूरी बात:* बार-बार नाभि खिसकना, तेज पेट दर्द, उल्टी या बुखार हो तो ये हर्निया, अपेंडिक्स या कोई और गंभीर समस्या भी हो सकती है। आयुर्वेदिक उपाय सपोर्ट के लिए हैं, पर सही कारण जानने के लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर या गैस्ट्रो विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। लगातार समस्या को नजरअंदाज न करें।

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