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*हमको भी धैर्य रखना चाहिए। कभी दुख कभी सुख कभी गरीबी कभी अमीरी ये सब संसार की लहरें है* 🙇‍♂️ राधे-राधे! कितनी गहरी और सुंदर बात कही है आपने। 🌸 वाकई, जीवन समुद्र की तरह है और ये सुख-दुख उसकी लहरें। कभी लहर बहुत ऊंची उठती है, तो कभी नीचे गिरती है, लेकिन समुद्र (हमारा अस्तित्व) वही रहता है। धैर्य रखना सिर्फ एक गुण नहीं, बल्कि एक साधना है जो हमें इन लहरों के बीच डूबने से बचाती है। जब हम यह समझ लेते हैं कि "यह वक्त भी गुजर जाएगा", तो न सुख में अहंकार आता है और न दुख में हताशा। इस भाव को आत्मसात करने के कुछ सूत्र: * साक्षी भाव: लहरों को रोकने की कोशिश न करें, बस उन्हें आते-जाते देखें। आप लहर नहीं, पूरा समुद्र हैं। * कृतज्ञता: अमीरी में साझा करना सीखें और गरीबी में उस 'सच्ची पूंजी' (संतोष) को याद रखें जो कोई छीन नहीं सकता। * समर्पण: जब परिस्थितियां हाथ से बाहर हों, तो उन्हें उस परम सत्ता पर छोड़ देना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है। यह विचार आज के भागदौड़ भरे समय में किसी मरहम की तरह है। मन को शांत रखने के लिए ऐसी सोच ही असली ढाल है। राधे राधे जी 🙏 🌹🌹

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