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ये वो रात है जो महाभारत में लिखी तो गई, पर इतिहास ने हमें कभी ठीक से समझाई ही नहीं। वो अंतिम रात क्या थी? 18 दिन युद्ध चला। कुरुक्षेत्र की धरती पर 1 अरब 66 करोड़ से ज्यादा योद्धा मारे जा चुके थे। चारों तरफ लाशें थीं, जलती चिताएं थीं, विधवाओं की चीखें थीं। पांडव जीत गए थे। हस्तिनापुर का सिंहासन खाली था। पर उस रात शिविर में *युधिष्ठिर रो रहे थे।* जीत के बाद भी। भगवान कृष्ण उनके पास आए और बोले — _"राजन, जीत गए, अब क्यों रोते हो?"_ युधिष्ठिर ने काँपती आवाज में कहा — > "माधव, यह जीत है या सजा? जिन्हें हराया वो अपने थे, जिन्हें खोया वो भी अपने थे। अभिमन्यु गया, घटोत्कच गया, द्रोण गए, भीष्म गए, मेरे भाई दुर्योधन गए... यह सिंहासन किस काम का जब बैठने वाले ही नहीं रहे?" तब कृष्ण की आँखें भर आईं। और उन्होंने वो बात कही जो आज के हर इंसान के लिए गीता से भी बड़ा सत्य है — > *"युधिष्ठिर, यही माया है। इंसान सारी उम्र कुछ पाने के लिए लड़ता है, और जब पा लेता है — तब समझता है कि जो खो दिया, वो पाए हुए से कहीं ज्यादा कीमती था।"* इसका आज के जीवन से क्या संबंध है? भाई साहब... रुको एक पल। चित्र में आगे जो लिखा है, वो हमारे लिए है — आज तुम भी वही कर रहे हो जो युधिष्ठिर ने युद्ध में किया, पर तुम्हारा युद्ध अलग है — - *पैसे के लिए नींद खो दी।* रात-रात भर जागकर पैसा तो कमा लिया, पर चैन की नींद खो दी। - *तरक्की के लिए परिवार से दूर हो गए।* नौकरी, प्रमोशन, शहर बदल लिया, पर माँ-बाप के साथ बैठकर खाना खाना छूट गया। - *सफलता के लिए दोस्ती तोड़ ली।* Competition में दोस्तों को पीछे छोड़ दिया। - *बड़ा घर बनाने के लिए माँ-बाप को वृद्धाश्रम भेज दिया।* 3 BHK में जगह तो बनी, पर आंगन में माँ की तुलसी नहीं रही। और एक दिन जब सब पा लोगे — बड़ा घर, गाड़ी, बैंक बैलेंस — तब उस बड़े घर में अकेले बैठकर वही सोचोगे जो उस रात युधिष्ठिर ने सोचा था — > *"यह सब किस काम का... जब अपने ही नहीं रहे।"* शिक्षा क्या है? महाभारत हमें युद्ध जीतना नहीं सिखाता, महाभारत हमें सिखाता है कि *किस कीमत पर जीत रहे हो, ये देखो।* जीत अगर अपनों को खोकर मिले, तो वो जीत नहीं, सबसे बड़ी हार है। इसलिए — 1. *कमाओ जरूर, पर अपनों को साथ लेकर।* पैसा फिर आ जाएगा, बचपन, माँ-बाप, दोस्ती फिर नहीं आएगी। 2. *महल नहीं, घर बनाओ।* जहाँ लोग हों, बातें हों, लड़ाई-झगड़ा भी हो, पर सन्नाटा न हो। 3. *युधिष्ठिर के पास कृष्ण थे समझाने के लिए, हमारे पास यह कहानी है।* आज रात सोने से पहले एक बार सोच लेना — हम जो पाने के लिए भाग रहे हैं, कहीं उसे पाने में वो तो नहीं खो रहे जो सच में अनमोल है? जय श्री कृष्णा 🙏

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