
SHREE SHARMA
447 days ago
सगुन ध्यान रुचि सरस नहिं, निर्गुन मन ते दूरि। तुलसी सुमिरहु राम को, नाम सजीवन मूरि॥ सगुण रूप के ध्यान में तो प्रीतियुक्त रुचि नहीं है और निर्गुण स्वरूप मन से दूर है यानी समझ में नही आता, तुलसीदास जी कहते हैं कि ऐसी दशा में रामनाम-स्मरण रूपी संजीवनी बूटी का सदा सेवन करो.. जय सियाराम 🙏
Comments (2)

SHREE SHARMA
Jun 9, 2025
जय श्री राम

Rama Devi Sahu
Jun 9, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Suprabhat Vandan Jii 🙏🌹🌹
