
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
366 days ago
*भारत में ब्रह्मा के मंदिर बहुत कम हैं।* कहा जाता है कि एक शाप के कारण उनकी पूजा नहीं होती। पर यह प्रतीकात्मक है — क्योंकि सृष्टि एक बार बनती है, बार-बार नहीं। जब सृष्टि आरंभ हो गई, तो “ब्रह्मा” का कार्य पूर्ण हो गया। अब संसार “विष्णु” के नियमों में चलता है। यह बताता है कि सृजन क्षणिक है, पर संरक्षण निरंतर है। जो सृजन कर चुका है, उसे “अहं” छोड़ना होता है। यही कारण है कि ब्रह्मा का अहं उनके ही विस्मरण का कारण बना। यह एक गहरी नीति है — सृजन को गर्व नहीं, समर्पण से पूर्ण करना चाहि

Comments (1)

sandhya bali
Oct 9, 2025
Jay Shri Krishna
