
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
318 days ago
॥संध्या दीप॥ दीप ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं सन्ध्यादीप नमोऽस्तु ते॥ भावार्थ:- दीपज्योत परब्रह्मस्वरूप अत्माज्योतीकी अनुभूती देती है, विश्वरूप जनार्दन कि अनुभूती देती है। ऐसी मंगलमयी अनुभूती से पाप का नाश हो। संध्या दीप को प्रणाम। 🌷‼️जय जय श्रीराम‼️🌷

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Oct 16, 2025
शुभ सन्धेया वंदन जी 🙏

Rama Devi Sahu
Oct 16, 2025
🙏🌹🪔 Subha Sandhya Vandan 🪔🌹🙏
