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राधे-राधे! प्रेमानंद महाराज जी अक्सर भगवान शिव और उनकी कृपा के बारे में बहुत ही सुंदर और गहरी बातें बताते हैं। उनके प्रवचनों के अनुसार, जब महादेव किसी पर कृपा करते हैं, तो उसके जीवन में कुछ विशेष परिवर्तन दिखने लगते हैं: भगवान शिव की कृपा के संकेत * भक्ति और वैराग्य का उदय: महाराज जी कहते हैं कि शिव जी की कृपा का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि व्यक्ति का मन संसार के भोग-विलास से हटकर भगवान के चरणों में लगने लगता है। व्यक्ति के भीतर 'वैराग्य' (attachments से मुक्ति) आने लगता है। * राम-नाम में रुचि: जैसा कि रामचरितमानस में भी कहा गया है और महाराज जी भी दोहराते हैं, शिव जी स्वयं निरंतर "राम" नाम का जप करते हैं। यदि आपकी रुचि भगवत-नाम (जैसे राधा-राधा या राम-राम) जपने में बढ़ रही है, तो समझ लीजिए कि यह महादेव की ही कृपा है। * सरलता और क्षमा: महादेव 'भोलेनाथ' हैं। उनकी कृपा जिस पर होती है, वह व्यक्ति भी स्वभाव से सरल हो जाता है और दूसरों के अपराधों को क्षमा करने का सामर्थ्य रखने लगता है। * विष को अमृत बनाना: शिव जी ने विष पान किया था। उनकी कृपा का अर्थ है कि जीवन में आने वाले कष्टों और अपमान के 'विष' को भी आप धैर्यपूर्वक सह लेते हैं और विचलित नहीं होते। महाराज जी का एक मुख्य विचार महाराज जी अक्सर कहते हैं कि शिव जी और श्री कृष्ण (या श्री राधा) में कोई भेद नहीं है। शिव जी परम वैष्णव हैं। जो शिव जी की शरण में जाता है, महादेव उसे भक्ति का ऐसा वरदान देते हैं कि उसका सीधा संबंध युगल सरकार (राधा-कृष्ण) से जुड़ जाता है। > "बिनु हरि कृपा मिलहिं नहिं संता" - और संतों का संग मिलना ही महादेव की सबसे बड़ी कृपा मानी जाती है। >

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