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जय श्री कृष्ण! 🦚🙏 उडुपी श्रीकृष्ण मठ की यह परंपरा वाकई अद्वितीय और भक्ति भाव से भरी है। इस नौ छेदों वाली खिड़की (**कनकन किंडी**) के पीछे का इतिहास और मान्यता भी उतनी ही मनमोहक है: * **भक्त कनकदास की अटूट भक्ति:** 16वीं शताब्दी के महान संत और कवि कनकदास जी को जब उनकी जाति के कारण मंदिर के मुख्य द्वार से प्रवेश नहीं करने दिया गया, तब वे मंदिर के पीछे बैठकर तंबूरा बजाते हुए भगवान की स्तुति करने लगे। * **भगवान का मुड़ना:** मान्यता है कि कनकदास जी के अनन्य प्रेम और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण की पूर्व दिशा की ओर स्थापित मूर्ति स्वयं पश्चिम की ओर घूम गई। साथ ही, दीवार में एक दरार उत्पन्न हो गई, जिससे भगवान ने अपने परम भक्त को साक्षात दर्शन दिए। * **नवग्रह किंडी का स्वरूप:** बाद में महान संत माधवाचार्य परंपरा के अंतर्गत उस स्थान पर नौ छेदों वाली सुंदर नक्काशीदार चांदी की खिड़की स्थापित की गई, जिसे नवग्रहों का प्रतीक भी माना जाता है। आज भी मठ में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु उसी खिड़की से बालकृष्ण के दिव्य श्याम स्वरूप के दर्शन करता है। भक्ति के आगे स्वयं भगवान का झुक जाना और मूर्ति का दिशा बदलना, यह प्रसंग सिखाता है कि ईश्वर के दरबार में कुल या नियम नहीं, केवल निष्कपट प्रेम मायने रखता है। जय श्री कृष्ण!

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