
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
148 days ago
卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐 🌞 दिनांक - 04 अप्रैल 2026 ⛅दिन - शनिवार ⛅विक्रम संवत् - 2083 ⛅अयन - उत्तरायण ⛅ऋतु - वसंत ⛅मास - वैशाख ⛅पक्ष - कृष्ण ⛅तिथि - द्वितीया सुबह 10:08 तक तत्पश्चात् तृतीया ⛅नक्षत्र - स्वाती रात्रि 09:35 तक तत्पश्चात् विशाखा ⛅योग - हर्षण दोपहर 02:17 तक तत्पश्चात् वज्र ⛅राहुकाल - सुबह 09:23 से सुबह 10:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅सूर्योदय - 06:17 ⛅सूर्यास्त - 06:43 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में ⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:44 से प्रातः 05:30 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:05 से दोपहर 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:06 से मध्यरात्रि 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:17 से रात्रि 09:35 तक) 🌥️विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹लू से बचने के लिए🔹 लू से बचने के लिए तेज धूप में घर से बाहर निकलते समय पानी पीकर एवं जूते व टोपी पहन के ही निकलें । एक साबुत प्याज साथ में रखें । लू लगने पर मोसम्बी के रस का सेवन बहुत ही लाभदायी हैं । 📖 ऋषि प्रसाद – मई २०२० 🔹सिर का सहज सुरक्षा-कवच टोपी🔹 🔸 धूप से अपने सिर की रक्षा करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है । धूप में नंगे सिर घूमने से सिर,आँख,नाक व कान के अनेक रोग होते हैं । सिर में गर्म हवा लगने एवं बारिश का पानी पड़ने से भी अनेक रोग होते हैं । धूप के दुष्प्रभाव से ज्ञान तंतुओं को क्षति पहुंचती है, जिससे यादशक्ति कम हो जाती है । 🔸 पूर्वकाल में हमारे दादा-परदादा नियमित रूप से टोपी या पगड़ी पहनते थे और महिलाएँ हमेशा सिर ढक कर रखती थी । इस कारण उन्हें समय से पूर्व बाल सफेद होना, अत्यधिक बाल झड़ना (गंजापन), सर्दी होना, सिर दर्द होना तथा आँख,कान,नाक के बहुत-से रोग इनका इतना सामना नहीं करना पड़ता था । 🔸 यदि आप अपने शरीर के उपरोक्त महत्वपूर्ण अंगों की कार्यक्षमता लम्बे समय तक बनाये रखना चाहते हैं तो धूप से अपने सिर की रक्षा कीजिये । इसके लिए टोपी अत्यंत सुविधाजनक तथा उपयोगी है । आयुर्वेद कहता है:- उष्णीषं कान्तिकृत्केश्यं रजोवातकफापहम् ।। लघु यच्छस्यते तस्मात् गुरुं पित्ताक्षिरोग कृत् ।। 🔸'मस्तक पर उष्णीष (पगड़ी, साफा, टोपी आदि) धारण करना कांति की वृद्धि6 करने वाला,केश के लिए हितकारी,धूलि को दूर करनेवाला अर्थात धूलि से बालों को बचानेवाला और वात तथा कफ का नाशक होता है । परंतु ये सब उत्तम लाभ तभी होते हैं जब वह हलका हो । यदि उष्णीष बहुत भारी हो तो पित्त की वृद्धि और नेत्र संबंधी रोग को उत्पन्न करने वाला होता है । (भावप्रकाश पु.लं., दिनचर्या दी प्रकरण ५.२३७) 🔸 सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा एवं होंठों के कैंसर का महत्वपूर्ण कारण मानी जाती हैं । ये किरणें काँचबिंदु जैसी आँखों की विकृतियों को भी जन्म देती है । 🔸 वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसी टोपियाँ जिनमें किनारों पर कम-से-कम ३ इंच की पट्टी चारों तरफ लगी है,सिर,चेहरा,कानों तथा गले को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती हैं, जिससे स्किन कैंसर से बचाव हो जाता है । घुमावदार टोपियाँ अधिक उपयुक्त होती हैं । 🔸चुनाव-प्रचार में बाँटने वाली सिंथेटिक टोपियां लाभकारी नहीं होतीं टोपियाँ मोटे कपड़े की होनी चाहिए । ▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬ 🚩जय श्री राम🚩 🚩धर्मो रक्षति रक्षितः 🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत

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