
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
17 days ago
13.8.2026 व्यक्ति सुबह चार पांच छ बजे जब भी सो कर उठता है, तभी से उसके मन में विचार उत्पन्न होने लगते हैं, और पूरा दिन चलते रहते हैं। रात्रि को जब वह सो जाता है, तब वे विचार रुकते हैं। इन विचारों में अधिकतर सांसारिक विचार ही होते हैं। *"जैसे खाना-पीना घूमना फिरना धन कमाना और किसी से राग द्वेष करना इत्यादि।" "तो इन सांसारिक विचारों को कुछ समय के लिए रोकना चाहिए।" "सुबह शाम बैठकर ईश्वर का ध्यान करना चाहिए। आधा-आधा घंटा भी सुबह-शाम बैठकर यदि आप ईश्वर का ध्यान करें, और उस समय इन सांसारिक विचारों को रोक दें, केवल ईश्वर का ही चिंतन स्तुति प्रार्थना उपासना आदि करें, तो इसे "महर्षि पतंजलि जी का योग" कहते हैं।"* इस योग से बहुत शांति मिलती है। *"क्योंकि ईश्वर सदा स्वयं शांत रहता है, और जो जो लोग एकांत में बैठकर ईश्वर का ध्यान करते हैं, उन सबको ईश्वर शांति देता है।"* ऐसी शांति संसार में किसी भी दुकान या बाजार में नहीं मिलती। *"इस शांति के बिना बहुत से लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं, और उनका जीवन अस्तव्यस्त हो जाता है। और कितने ही लोग तो अपने मन पर नियंत्रण न रख पाने के कारण आत्महत्या तक भी कर लेते हैं। ऐसा कभी नहीं करना चाहिए।"* *"जब तक संसार के विचार आपके मन में चलते रहेंगे, तब तक सूक्ष्म रूप से मन में कोई न कोई राग द्वेष भी चलता रहेगा।" "इसलिए आत्महत्या जैसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए तथा मन की शांति प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन ईश्वर का ध्यान उपासना आदि करना अत्यंत आवश्यक है। सुबह शाम कम से कम आधा-आधा घंटा ईश्वर का ध्यान अवश्य करें। यह आपकी रक्षा करेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (1)

सविता
Aug 13, 2026
RADHE RADHE 🙏🌹
