
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
159 days ago
जय माता दी! 🙏 शुभरात्रि। आपका आज का विश्राम मंगलमय हो। आज की सीख 'धैर्य और संस्कार' पर आधारित है: जिस प्रकार एक छोटे से बीज को वृक्ष बनने के लिए मिट्टी के भीतर अंधेरे में धैर्य के साथ प्रतीक्षा करनी पड़ती है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में 'संस्कार' वह मिट्टी है जो उसे थामे रखती है और 'धैर्य' वह समय है जो उसे फलने-फूलने का अवसर देता है। याद रखें, अनुशासन का अर्थ स्वयं को कष्ट देना नहीं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करना है। जो व्यक्ति अपने माता-पिता के त्याग का सम्मान करता है और अपनी जड़ों (संस्कारों) से जुड़ा रहता है, उसे दुनिया की कोई भी आंधी हिला नहीं सकती। आज का विचार: > "शक्ति और पद विरासत में मिल सकते हैं, लेकिन संस्कार और चरित्र स्वयं की मेहनत से ही कमाने पड़ते हैं।" >

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
