
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
193 days ago
राधा-कृष्ण का नाम साथ लेना ही पूर्णता का प्रतीक है। माना जाता है कि 'राधा' आत्मा है और 'कृष्ण' परमात्मा। बिना राधा के कृष्ण अधूरे हैं और बिना कृष्ण के राधा। इनका प्रेम संसार को सिखाता है कि प्रेम केवल पाने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे में विलीन हो जाने का नाम है। 🌸 राधा-कृष्ण के प्रेम के कुछ सुंदर पहलू: * निस्वार्थ प्रेम: जहाँ कोई शर्त नहीं होती, केवल समर्पण होता है। * अद्वैत: शास्त्रों में कहा गया है— "राधा कृष्णायोः भेदः नास्ति", अर्थात राधा और कृष्ण में कोई भेद नहीं है, वे एक ही प्राण के दो शरीर हैं। * मुरली की तान: कहते हैं जब कान्हा मुरली बजाते थे, तो वह केवल राधा का नाम पुकारती थी। ✨ एक छोटा सा प्रसंग: एक बार राधा जी ने कृष्ण से पूछा— "कान्हा, हमसे शादी क्यों नहीं की?" कृष्ण ने मुस्कुराकर उत्तर दिया— "राधे, शादी के लिए दो लोगों की जरूरत होती है, और हम तो एक ही हैं।"
Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Feb 19, 2026
राधे राधे जी 🙏

R k jangid phulera Jaipur
Feb 19, 2026
राधे राधे जी🙏
