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पौराणिक ग्रंथों, विशेष रूप से **गणेश पुराण** और **मुद्गल पुराण** के अनुसार, भगवान गणेश ने अलग-अलग युगों में असुरों के संहार और अधर्म के नाश के लिए विभिन्न अवतार लिए हैं। मुद्गल पुराण में गणेश जी के मुख्य **8 अवतारों** का विस्तार से वर्णन मिलता है, जबकि गणेश पुराण और अन्य कथाओं को मिलाकर उनके प्रमुख 10 स्वरूप या अवतार इस प्रकार माने गए हैं: * **1. वक्रतुण्ड (Vakratunda)**: इनका वाहन सिंह (शेर) है। इन्होंने **मत्सरासुर** (ईर्ष्या/द्वेष के प्रतीक) का वध कर संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया था। * **2. एकदन्त (Ekadanta)**: इनका वाहन मूषक (चूहा) है। इन्होंने **मदासुर** (अहंकार और मद के प्रतीक) का संहार किया था। * **3. महोदर (Mahodara)**: इनका वाहन भी मूषक है। इन्होंने ज्ञान और विवेक से **मोहासुर** (अंध मोह के प्रतीक) को पराजित किया था। * **4. गजानन (Gajanana)**: इनका वाहन मूषक है। इन्होंने **लोभासुर** (लालच के प्रतीक) का मानमर्दन किया और उसका संहार किया। * **5. लम्बोदर (Lambodara)**: इनका वाहन मूषक है। इन्होंने **क्रोधासुर** (क्रोध के प्रतीक) को नियंत्रित कर शांति की स्थापना की थी। * **6. विकट (Vikata)**: इनका वाहन मयूर (मोर) है। इन्होंने **कामासुर** (वासना के प्रतीक) के प्रभाव को नष्ट करने के लिए यह अवतार लिया था। * **7. विघ्नराज (Vighnaraja)**: इनका वाहन शेषनाग है। इन्होंने **ममासुर** (ममता और अधिकार भावना के अहंकार) का नाश किया था। * **8. धूम्रवर्ण (Dhumravarna)**: इनका वाहन अश्व (घोड़ा) है। इन्होंने **अभिमानासुर** (गर्व/अभिमान के प्रतीक) का संहार किया था। * **9. महोत्कट विनायक (Mahotkata Vinayaka)**: सतयुग का प्रमुख अवतार, जिसमें वे दस भुजाओं वाले तेजस्वी रूप में प्रकट हुए। इन्होंने नरान्तक और देवान्तक जैसे शक्तिशाली दैत्यों का वध किया था। * **10. मयूरेश्वर / गजानन (Mayureshwara / Dhumraketu)**: त्रेतायुग में मोर की सवारी करने वाले 'मयूरेश्वर' के रूप में इन्होंने सिन्दूरासुर का वध किया। कलयुग के अंत के लिए शास्त्रों में इनके **धूम्रकेतु** स्वरूप का भी उल्लेख है, जो नीले घोड़े पर सवार होकर अधर्म का नाश करेंगे।

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