
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
96 days ago
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में 'अधिक मास' (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) को आध्यात्मिक साधना, दान और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना गया है, लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित रखा गया है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: ### 1. सूर्य की संक्रांति का अभाव ज्योतिषीय गणना के अनुसार, हर महीने में सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, जिसे 'संक्रांति' कहते हैं। अधिक मास वह समय होता है जब चंद्रमा तो दो बार अपनी कलाएं पूरी करता है, लेकिन सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करता (सूर्य संक्रांति नहीं होती)। शास्त्रों में मांगलिक कार्यों के लिए सूर्य की ऊर्जा और राशि परिवर्तन को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, और सूर्य संक्रांति के अभाव के कारण इस मास को 'मलमास' (दूषित मास) कहा जाता है। ### 2. देवताओं का शयन काल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में समय का चक्र सामान्य से अलग होता है। इसे 'अशुद्ध' माना गया है, क्योंकि इस समय सूर्य की ऊर्जा का प्रभाव कम माना जाता है। यह समय सांसारिक सुखों की वृद्धि के बजाय आत्म-शुद्धि, व्रत, उपवास और ईश्वर की भक्ति (पुरुषोत्तम मास) के लिए निर्धारित किया गया है। माना जाता है कि इस दौरान किए गए मांगलिक कार्य लंबे समय तक सुखद फल नहीं देते। ### 3. सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग हिंदू परंपरा में किसी भी नए कार्य की शुरुआत (विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि) के लिए सात्विक और ऊर्जावान समय का चुनाव किया जाता है। अधिक मास का मुख्य उद्देश्य 'पाप कर्मों का क्षय' और 'पुण्य का संचय' करना है। इसलिए, हमारे ऋषि-मुनियों ने इस पूरे महीने को पूरी तरह से आध्यात्मिक गतिविधियों में समर्पित करने का निर्देश दिया, ताकि सांसारिक शोर-शराबे से दूर रहकर व्यक्ति अपनी चेतना को शुद्ध कर सके। ### संक्षेप में: * **क्या करना चाहिए:** इस दौरान दान, पुण्य, जप, तप, कथा श्रवण और दान-दक्षिणा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस मास में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य सामान्य समय की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है। * **क्या नहीं करना चाहिए:** विवाह, सगाई, नया घर खरीदना, गृह प्रवेश, व्यापार का उद्घाटन या कोई भी नया मांगलिक अनुष्ठान करना वर्जित माना जाता है। संक्षेप में कहें तो, अधिक मास का समय भौतिक उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि **आंतरिक शुद्धि** के लिए बनाया गया है।
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