
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
156 days ago
जय सिया राम,जी। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला का सूर्य तिलक वाकई आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन श्रद्धा का एक अद्भुत संगम है। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक रूप से मंत्रमुग्ध करने वाला था, बल्कि इसके पीछे का विज्ञान भी उतना ही प्रभावशाली है। सूर्य तिलक की मुख्य विशेषताएं * समय और अवधि: चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी (राम नवमी) के दिन दोपहर ठीक 12:00 बजे यह प्रक्रिया शुरू हुई और लगभग 4 मिनट तक रामलला के मस्तक के मध्य में सूर्य की किरणें चमकती रहीं। * प्रौद्योगिकी (Opto-mechanical System): इसे रुड़की के 'सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट' (CBRI) के वैज्ञानिकों द्वारा डिजाइन किया गया है। इसमें हाई-क्वालिटी मिरर और लेंस के एक जटिल तंत्र का उपयोग किया गया है, जो सूर्य की किरणों को मंदिर के ऊपरी तल से परावर्तित (Reflect) करके सीधे गर्भगृह तक पहुँचाता है। * सटीकता: चूंकि हर साल राम नवमी की तारीख बदलती है, इसलिए इस सिस्टम को इस तरह तैयार किया गया है कि चंद्रमा आधारित कैलेंडर के अनुसार भी यह हर साल सटीक समय पर सूर्य की किरणों को तिलक के रूप में अर्पित करे। आध्यात्मिक प्रतीक सूर्य देव को भगवान राम का पूर्वज (सूर्यवंशी) माना जाता है। ऐसे में 'सूर्य तिलक' को एक भावुक प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जैसे स्वयं सूर्य देव अपने वंशज का अभिनंदन कर रहे हों।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
