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*"फिर भी दयालुता, सिंहासन और मुकुट से ऊँची रहे"* 💛 तस्वीर में एक बच्चा और बुजुर्ग का हाथ मिलाना, और ऊपर लिखी पंक्तियाँ - दोनों मिलकर *सबसे बड़ी सीख* दे रही हैं। --- *कविता का अर्थ - लाइन दर लाइन* *"रूप निखरे बसंत-सा, पर जल्दी ढल जाए"* जवानी, सुंदरता, ताकत - सब *बसंत की तरह* होती है। आज है, कल ढल जाती है। *बुजुर्ग की झुर्रियाँ* यही बता रही हैं। *"पर कोमल हृदय जैसे, चाँद-सा जगमगाए"* पर *दया, करुणा, प्रेम* वाला दिल कभी बूढ़ा नहीं होता। वो *चाँद की तरह* हर अँधेरे में जगमगाता है। बच्चे की आँखों में वही चमक है। *"साम्राज्य उजड़े, संगमर भी टूटे-बिखरे"* शक्ति, पैसा, राजपाट, महल - सब एक दिन *धूल हो जाते हैं*। *सिंहासन खाली हो जाता है, मुकुट गिर जाता है*। *"पर दयालुता की मिसाल, सिंहासन और मुकुट से ऊँची रहे"* पर जो इंसान *दूसरे का दर्द समझे, हाथ थामे, मुस्कुरा दे* - वो *इतिहास में जिंदा रहता है*। उसका नाम *पत्थर पर नहीं, दिलों पर लिखा जाता है*। --- *तस्वीर का मेसेज* देखो, बुजुर्ग के पास *न ताकत है, न पैसा, न पद*। हाथ में सिर्फ *लाठी* है। और बच्चे के पास है *सिर्फ एक मुस्कान और एक हाथ*। पर दोनों के बीच जो *जुड़ाव* है, वो *करोड़ों के महल से बड़ी दौलत* है। *दयालुता = बिना स्वार्थ के किसी का हो जाना*। ना तुम बड़े हो, ना मैं छोटा। *दर्द एक है, इंसान एक है*। *सीधी बात* आज की दुनिया *"क्या है तेरे पास?"* पूछती है। पर ये तस्वीर पूछती है: *"तू कैसा इंसान है?"* *सिंहासन और मुकुट तो किराये पर मिलते हैं।* *दयालुता कमानी पड़ती है।* आज से एक काम करो - *जो सबसे कमजोर लगे, उसका हाथ पकड़ो।* बस वही *असली राजा* बनाता है। 👑 *कौन है तुम्हारी ज़िंदगी में वो बुजुर्ग, जिसका हाथ आज पकड़ना बनता है?*

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