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कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के श्रृंगेरी में स्थित विद्याशंकर मंदिर (Vidyashankara Temple) अपनी अनूठी वास्तुकला और खगोलीय विशेषताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस मंदिर से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: 1. वास्तुकला का अद्भुत संगम यह मंदिर 1338 ईस्वी में विजयनगर साम्राज्य के संस्थापकों के गुरु, श्री विद्यातीर्थ की स्मृति में बनाया गया था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह होयसल और द्रविड़ शैली का एक अनूठा मिश्रण है। पूरा मंदिर नक्काशीदार पत्थरों से बना है और देखने में एक विशाल रथ जैसा प्रतीत होता है। 2. राशि स्तंभ (Zodiac Pillars): खगोलीय चमत्कार मंदिर के मुख्य मंडप में 12 खंभे हैं, जिन्हें 'राशि स्तंभ' कहा जाता है। इन स्तंभों की खासियतें इस प्रकार हैं: * सूर्य की किरणें: इन 12 खंभों पर 12 राशियों के चिह्न बने हुए हैं। इन्हें इस तरह से बनाया गया है कि हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार, जिस महीने की जो राशि होती है, सूर्य की पहली किरणें उसी विशेष राशि वाले खंभे पर पड़ती हैं। * समय का ज्ञान: मंदिर के फर्श पर बनी रेखाएं इन खंभों की छाया के आधार पर समय और सौर स्थिति का सटीक संकेत देती हैं, जिससे यह मंदिर एक प्राचीन 'धूपघड़ी' (Sundial) की तरह भी कार्य करता है। 3. अन्य प्रमुख विशेषताएं * गर्भगृह: मुख्य गर्भगृह में 'विद्याशंकर लिंग' स्थापित है। इसके अलावा यहाँ ब्रह्मा, विष्णु, महेश और उनकी पत्नियों के साथ-साथ विद्या गणपति और मां दुर्गा की भी मूर्तियाँ हैं। * नक्काशी: मंदिर की बाहरी दीवारों पर हिंदू पुराणों के दृश्यों, हाथियों, घोड़ों और विभिन्न देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी की गई है। * स्थान: यह पवित्र तुंगा नदी के किनारे स्थित है। श्रृंगेरी शारदा पीठम के परिसर में होने के कारण इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। दर्शन का समय: * सुबह: 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक * शाम: 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि प्राचीन भारत के विज्ञान, गणित और वास्तुकला के ज्ञान का एक जीवंत प्रमाण है।

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