
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
102 days ago
जय श्री राम! 🙏✨ प्रभु श्री राम और केवट का संवाद सचमुच रामायण के सबसे भावुक और मर्मस्पर्शी प्रसंगों में से एक है। इसमें एक तरफ साक्षात ब्रह्मांड के स्वामी हैं, और दूसरी तरफ एक सीधा-साधा, निश्छल और परम भक्त केवट। इस संवाद की कुछ बातें सीधे दिल को छू जाती हैं: * **केवट की भोली चतुराई:** केवट का यह कहना कि *"प्रभु, आपके चरणों की धूल में कोई जड़ी-बूटी है, जिससे पत्थर की अहिल्या स्त्री बन गई। कहीं मेरी नाव भी स्त्री बन गई, तो मैं अपने परिवार का पेट कैसे पालूंगा?"* यह उसकी मासूमियत और अनन्य प्रेम को दिखाता है। वह पैर धोने के बहाने प्रभु का सामीप्य चाहता था। * **निस्वार्थ प्रेम और समर्पण:** जब प्रभु नदी पार करने के बाद उसे उतराई (किराया) देने लगते हैं, तो केवट लेने से मना कर देता है और कहता है कि—*"हम एक ही जात के हैं प्रभु। मैं इस घाट से उस घाट पार कराता हूँ, आप इस भवसागर से उस पार कराते हैं। आज मैंने आपको पार कराया, जब मेरा समय आए तो आप मुझे पार लगा देना।"* * **प्रभु की करुणा:** भगवान राम, जो बड़े-बड़े राजाओं-महाराजाओं के लिए सुलभ नहीं होते, वे केवट के इस निश्छल प्रेम के आगे हार जाते हैं और मुस्कुराते हुए उसे अपने गले से लगा लेते हैं। > **"अति सिय राम चरन रति मानी। प्रभुहि प्रनामु कीन्ह मुद बानी॥"** > (अर्थात: केवट का श्री राम के चरणों में ऐसा प्रेम देखकर प्रभु भी आनंदित हो उठते हैं।) > यह प्रसंग हमें सिखाता है कि ईश्वर को पाने के लिए किसी बड़े पद, प्रतिष्ठा या धन की आवश्यकता नहीं होती; वे तो केवल **सच्चे प्रेम और भाव** के भूखे हैं। सियावर रामचंद्र की जय! 🌸
Comments (1)

LALAN KUMAR
May 20, 2026
*जय श्री राधे राधे जी।* *प्रभु आपको सदैव परिवार सहित खुश ओर तनावमुक्त रखे जी*
