
SHREE SHARMA
443 days ago
ऐसे बना गरुड़ विष्णुजी का वाहन पौराणिक कथा के अनुसार स्वर्ग में देवताओं ने युद्ध करने के बाद जिस अमृत कलश को असुरों से प्राप्त किया था, गरुड़ ने उसे देवताओं से छीन लिया था क्योंकि इससे वह अपनी मां को सांपों की माँ कद्रू की दासता से मुक्ति दिलाना चाहते थे। कद्रू ने यह प्रस्ताव रखा कि, यदि तुम मेरे पुत्रों के लिए अमृत ला दोगे तो तुम्हारी मां दासत्व से मुक्त हो जाएगी। इसके लिए गरुड़ स्वर्ग पहुंचे और देवताओं की सुरक्षा व्यवस्था को भंग करके अमृत लेकर उड़ गए। सभी देवताओं ने अमृत कलश को बचाने का खूब प्रयास किया, लेकिन गरुड़ अपने मुख से अमृत लेकर उड़ गए। गरुड़ अमृत कलश लेकर कद्रु के पास पहुंचा और उससे बोला- “माते ! अपनी प्रतिज्ञानुसार मैं अमृत कलश ले आया हूं। अब आप अपने वचन से मेरी माता को मुक्त कर दे।” कद्रु ने उसी क्षण विनता को वचन से मुक्त कर दिया और अगली सुबह अमृत नागो को पिलाने का निश्चय कर वहां से चली गई। रात को उचित मौका देखकर इंद्र ने अमृत कलश उठा लिया और पुनः उसी स्थान पर पहुंचा दिया । दूसरे दिन सुबह नाग जब वहां पहुंचे तो अमृत कलश गायब देखकर दुखी हुए। उन्होंने उस कुशा को ही जिस पर अमृत कलश रखा था चाटना आरम्भ कर दिया जिसके कारण उनकी जीभ दो हिस्सों में फट गई। गरुड़ की मातृभक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु गरुड़ के सम्मुख प्रकट हो गए और बोले- “मैं तुम्हारी मातृभक्ति देखकर बहुत प्रसन्न हूं पक्षीराज ! मैं चाहता हूं कि अब से तुम मेरे वाहन के रूप में मेरे साथ रहा करो।” गरुड़ बोला- “मैं बहुत भाग्यशाली हूं प्रभु जो स्वयं आपने मुझे अपना वाहन बनाना स्वीकार किया। आज से मैं हर क्षण आपकी सेवा में रहूंगा और आपको छोड़कर कही नहीं जाऊंगा।” इस तरह उसी दिन से पक्षीराज गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन के रूप में प्रयुक्त होने लगे।
Comments (1)

Rama Devi Sahu
Jun 13, 2025
Jai Shree Hari Vishnu Bhagwan ki 🙏 Subh Dopahar Jii 🙏🌹🌹
