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वाग्रतवा (रायसेन) किले के बारे में यह लोककथा बहुत प्रसिद्ध है कि वहाँ आज भी राजा रायसेन का पारस पत्थर मौजूद है। हालांकि, इसके पीछे की कहानी ऐतिहासिक तथ्यों से ज्यादा मान्यताओं और किंवदंतियों पर आधारित है। इस रहस्य से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें नीचे दी गई हैं: पारस पत्थर की कहानी लोककथाओं के अनुसार, रायसेन के राजा सेन के पास पारस पत्थर था, जिससे वे लोहे को छूकर सोना बना सकते थे। जब किले पर आक्रमण हुआ और राजा को अपनी हार निश्चित लगी, तो उन्होंने उस पत्थर को किले के ही किसी गुप्त तालाब या कुएं में फेंक दिया ताकि वह किसी और के हाथ न लगे। किले का रहस्य और सुरक्षा * जिन्नों का पहरा: स्थानीय लोग और कहानियों के अनुसार, उस पत्थर की रखवाली आज भी एक जिन्न (अदृश्य शक्ति) करता है। कहा जाता है कि कई लोगों ने उसे ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे। * तांत्रिकों की कोशिश: समय-समय पर यहाँ कई लोग खुदाई या तंत्र-मंत्र के जरिए पत्थर खोजने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन आज तक किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ। वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण अगर इतिहास और विज्ञान की दृष्टि से देखें, तो पारस पत्थर जैसी किसी धातु का अस्तित्व साबित नहीं हुआ है जो लोहे को सोना बना सके। भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) ने भी इस तरह के किसी दावे की पुष्टि नहीं की है। निष्कर्ष: यह किला अपनी शानदार वास्तुकला और इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से यहाँ का प्राचीन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (जल संचयन प्रणाली) बहुत उन्नत था। पारस पत्थर यहाँ है या नहीं, यह आज भी एक अनसुलझा रहस्य है जो सैलानियों को इस किले की ओर आकर्षित करता है।

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