
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
1 day ago
*🌹ज्येष्ठा गौरी के 3 दिन का उत्सव, किस दिन क्या करते हैं? जानें विस्तार से🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕ज्येष्ठा गौरी उत्सव 2026 : ज्येष्ठा गौरी (जिन्हें महालक्ष्मी भी कहा जाता है) मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में गणेशोत्सव के दौरान अत्यंत भक्तिभाव और विधि-विधान के साथ मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण 3 दिवसीय पर्व है।* *इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाओं को आमंत्रित कर उन्हें भोजन कराया जाता है तथा हल्दी-कुमकुम और श्रृंगार सामग्री भेंट कर सम्मानित किया जाता है। आइए जानते हैं विस्तार से इस 3 दिवसीय पर्व में क्या-क्या होता है...* *⚜️3 दिवसीय पर्व की मुख्य तिथियां* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* *🚩गौरी आह्वान (स्थापना):-* 17 सितंबर 2026 *🚩ज्येष्ठ गौरी पूजन:-* 18 सितंबर 2026 *🚩गौरी विसर्जन:-* 19 सितंबर 2026 `•प्रथम दिन` *⚜️गौरी आवाहन (आगमन)* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* पहले दिन मां गौरी का घर में अत्यंत आदर और गाजे-बाजे के साथ स्वागत किया जाता है। भक्तिमय माहौल के बीच माता के पद-चिह्न बनाकर उन्हें मुख्य द्वार से लाकर स्थापित किया जाता है। माना जाता है कि माता अपने साथ अपार खुशियां और समृद्धि लेकर घर में प्रवेश करती हैं। कई स्थानों पर इन्हें गणेश जी की बहन के रूप में मानकर 2 स्वरूपों (ज्येष्ठ और कनिष्ठ) में स्थापित किया जाता है। `•द्वितीय दिन` *⚜️महालक्ष्मी पूजन एवं भव्य भोग* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* यह उत्सव का मुख्य दिन होता है। इस दिन माता गौरी का सोलह श्रृंगार कर विशेष पूजन किया जाता है। इस अवसर पर देवी महालक्ष्मी को पारंपरिक व्यंजनों (जैसे पुरणपोली, कढ़ी-चावल और विविध प्रकार की सब्जियां) का भव्य भोग (महाप्रसाद) अर्पित किया जाता है। `•तृतीय दिन` *⚜️गौरी विसर्जन (विदाई)* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* तीसरे दिन भावुक मन से माता की उत्तर पूजा की जाती है। आरती और विशेष प्रार्थना के बाद अगले वर्ष पुनः आने के मंगल संदेश के साथ माता गौरी का विसर्जन किया जाता है। *⚜️अखंड सौभाग्य की कामना* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, बच्चों की सफलता और पूरे परिवार की सुख-शांति के लिए यह निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं। ज्येष्ठ गौरी का यह पर्व घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, आपसी प्रेम और सांस्कृतिक निरंतरता का संचार करता है। *⚜️हल्दी-कुमकुम एवं श्रृंगार सामग्री का दान* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* इस अवसर पर पड़ोस और रिश्तेदारी की शादीशुदा महिलाओं (सुहागिनों) को बड़े प्रेम से घर पर आमंत्रित किया जाता है। उन्हें पूर्ण श्रद्धा के साथ सात्विक भोजन कराया जाता है। भोजन के उपरांत सभी आमंत्रित महिलाओं को हल्दी-कुमकुम लगाया जाता है और भेंट स्वरूप श्रृंगार सामग्री (जैसे चूड़ियां, साड़ी, फल या सौभाग्य द्रव्य) देकर उन्हें आदरपूर्वक विदा किया जाता है। *🚩#जय_माता_की🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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