
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
128 days ago
कान्हा की बांसुरी केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि भक्ति की वह पुकार है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ देती है। जब भी श्रीकृष्ण की बांसुरी बजती है, तो समय ठहर जाता है और केवल प्रेम की गूँज सुनाई देती है। आपकी इस सुंदर भावना के लिए यहाँ कुछ पंक्तियाँ हैं: ### **बांसुरी और भक्ति का सार** * **अधरों की मुस्कान:** बांसुरी के छिद्रों से जब कान्हा की फूँक गुजरती है, तो वह निर्जीव लकड़ी भी 'राधे-राधे' गाने लगती है। * **समर्पण का प्रतीक:** जैसे बांसुरी भीतर से खाली होती है, वैसे ही सच्चा भक्त भी अपने अहंकार को शून्य कर देता है, ताकि ईश्वर उसमें अपना सुर भर सकें। * **प्रेम का निमंत्रण:** यह बांसुरी की ही तान थी जिसने मीरा को जोगन बनाया और गोपियों को सुध-बुध भुलाने पर मजबूर कर दिया। > **"अधर धरें कहुँ मन्द बजावत, मोहनी तान सुनाय।** > **भक्ति भाव में डूबा मनवा, सुध-बुध सब बिसराय॥"** > भक्ति के इस सफर में कान्हा की मुरली की मधुरता हमेशा बनी रहे।
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