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🌿 गोवर्धन पूजा : सनातन का पर्यावरण दर्शन 🌿 द्वापर युग में दीपावली के दूसरे दिन इंद्रदेव की पूजा का प्रचलन था। किन्तु एक बार श्रीकृष्ण ने कहा — "कार्तिक मास में इंद्र की पूजा से अधिक महत्वपूर्ण है गौ-सेवा, पर्वत एवं पर्यावरण की पूजा।" इसी विचार से रूष्ट होकर इंद्रदेव ने घनघोर वर्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावनवासियों की रक्षा की। उसी दिवस से गोवर्धन पूजा का शुभारम्भ हुआ — जो वास्तव में प्रकृति, पर्यावरण, गौ एवं अन्न के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। 🌾🐄⛰️ अब प्रश्न यह है — जो कथित “लिबरल” और “पर्यावरण प्रेमी” आज भारत और हिंदुओं को पर्यावरण का ज्ञान देने निकलते हैं, वे गोवर्धन पूजा क्यों नहीं मनाते❓ जबकि गोवर्धन पूजा ही तो विश्व की प्रथम पर्यावरण उत्सव परंपरा है! जो लोग भारत को ‘पर्यावरण शिक्षा’ देने का दावा करते हैं, वे बताएँ — उनकी किस किताब या तथाकथित धर्मग्रंथ में किसी ईश्वर, पैगम्बर या मैसेंजर ने ‘देव पूजा’ की बजाय पर्यावरण पूजा का आदेश दिया है❓ 🌿 सनातन धर्म ने तो हजारों वर्षों पहले ही कहा — "वनं देवानां आलयं" — वन ही देवताओं का निवास है। अतः सनातनी बंधुओं, इन कथित “पर्यावरण-ज्ञानी” पाखंडियों की बातों में न आएँ, अपितु उनसे प्रश्न पूछें और उन्हें उनके ही दोहरे मापदंडों पर आइना दिखाएँ। 🚩 जय गौ माता की! 🚩 जय श्रीकृष्ण की!

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 22, 2025

Sanatan Dharma ki Prachar krne Logo ke liye Bahut hi Sundar Barta 👌👌 Dhanyawad Bhai 🙏 Sach me Kahne ke liye ye Sab Baat Only Kitab me hai...Hna, Brindavan ki Goverdhan Puja Badi Dhum Dham se Mana Rahe hai... Jai Ho Krishna Bhagwan ki 🙏🙏