
Rama Devi Sahu
335 days ago
मातु पिता भ्राता हितकारी। मितप्रद सब सुनु राजकुमारी॥ अमित दानि भर्ता बयदेही। अधम सो नारि जो सेव न तेही॥ देवी अनुसूया माता सीता से नारी धर्म का ज्ञान देते हुए कहती है कि हे राजकुमारी! सुनिए- माता, पिता, भाई सभी हित करने वाले हैं, परन्तु ये सब एक सीमा तक ही (सुख) देने वाले हैं, परन्तु हे जानकी! पति तो (मोक्ष रूप) असीम (सुख) देने वाला है। वह स्त्री अधम है, जो ऐसे पति की सेवा नहीं करती.. जय सियाराम 🙏

Comments (4)

Radhe Radhe
Oct 10, 2025
🙏🏹*_* जी बहन जी*_* हिंदी में कहावत है, मात- पिता की सेवा कीजै, घर *में* है__सुख _भारी _होता_ दिल _का ना _:::::::: सच (("बहनजी")) बहुत अच्छी पोस्ट।।🏹🙏

Rama Devi Sahu
Oct 10, 2025
🙏🙏🌹🙏🙏 Good Evening Jii 🌹🌹

