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हिन्दू धर्म और शास्त्रों के अनुसार **सात माताओं** (सप्त मातृका) का विशेष महत्व है। मुख्य रूप से 'सप्तमातृका' समूह में निम्नलिखित देवियाँ शामिल हैं: 1. **ब्राह्मणी:** ब्रह्मा की शक्ति। 2. **वैष्णवी:** विष्णु की शक्ति। 3. **माहेश्वरी:** शिव की शक्ति। 4. **इन्द्राणी:** इन्द्र की शक्ति। 5. **कौमारी:** कार्तिकेय की शक्ति। 6. **वाराही:** भगवान वराह की शक्ति। 7. **चामुण्डा (या नारसिंही):** देवी चंडिका की शक्ति। ### व्यवहारिक और सामाजिक दृष्टि से सात माताएँ पौराणिक मान्यताओं और स्मृतियों (जैसे अत्रि स्मृति) में उन सात स्वरूपों का भी वर्णन है जिन्हें समाज में 'माता' के समान आदर दिया जाना चाहिए: * **सगी माता:** जिसने जन्म दिया हो। * **गुरु की पत्नी:** शिक्षा देने वाले गुरु की पत्नी। * **ब्राह्मणी:** ब्राह्मण की पत्नी। * **राजपत्नी:** राजा की पत्नी (राष्ट्र माता)। * **धाय मां:** पालन-पोषण करने वाली (नर्स या दाई)। * **गौ (गाय):** जो दूध पिलाकर पोषण करती है। * **पृथ्वी:** जो समस्त जीवों को आधार और अन्न देती है। इन सातों को **'मातृवत'** यानी माता के समान पूजनीय माना गया है।

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