MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

188 days ago

समुद्र मंथन के दौरान निकले विनाशकारी 'हलाहल विष' को पीकर सृष्टि की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने उसे गले में धारण किया था। इस घटना के कारण महादेव का गला नीला पड़ गया, जिसके बाद उन्हें नीलकंठ (नीले गले वाले) के नाम से जाना गया और यह एक महादेव की नीलकंठ कहानी के रूप में प्रचलित है। विष धारण करने की छोटी कहानी समुद्र मंथन और विष की उत्पत्ति: देवताओं और असुरों द्वारा अमृत पाने के लिए जब समुद्र मंथन किया जा रहा था, तब अमृत से पहले 'हलाहल' नामक भयंकर विष निकला। सृष्टि का विनाश: यह विष इतना प्रचंड था कि इससे पूरी सृष्टि के नष्ट होने का खतरा था। विष की लपटों से सभी देव और असुर जलने लगे। महादेव की कृपा: कोई अन्य उपाय न देखकर सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की। महादेव ने संसार की रक्षा के लिए वह हलाहल विष पी लिया। पार्वती जी का सहयोग: माना जाता है कि देवी पार्वती ने विष को शिव जी के शरीर के अंदर जाने से रोकने के लिए उनके गले को दबा दिया, जिससे वह विष कंठ में ही रह गया और नीला पड़ गया। इसीलिए भगवान शिव को मृत्युंजय (मृत्यु को जीतने वाला) भी कहा जाता है, क्योंकि विष जैसी साक्षात् मृत्यु भी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकी। तपस्या अगर माता पार्वती की थी तो प्रतीक्षा भगवान शिव की भी थी, 🔱🙏

Comments (8)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 23, 2026

🙏🔱 Jai Shree Mahakaal 🔱🙏🕉️🌿

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 23, 2026

Good Afternoon Jii 🌹 Chay ke liye Bahut Bahut Dhanyawad Ji 🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 23, 2026

Ji Dhanyawad 🙏 Bhagwan Aap ko Hamesha Mangal Rakhe or Swastha Surakshit Rakhe 🙏 Aap ka Har Pal Subha Mangalmay Ho 🙏 Subha Dopahar Jii 🙏 Jai Ho Bhole Nath 🙏🔱🌿

Mayank S

Mayank S

Feb 23, 2026

good afternoon ji ☕

Mayank S

Mayank S

Feb 23, 2026

Jai shree mahakal 🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Feb 23, 2026

बहुत ही अच्छी पोस्ट है जी बाहु बाहु धन्यवाद जी भोले नाथ 🔱 🙏 की कृपा आप पर सदा बनी रहे जी 🙏🙏🙏🙏🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 23, 2026

🙏🔱 Har Har Mahadev 🔱 Om Namah Shivay 🔱🙏 Subha Somavar 🌹 Shubha Dopahar Jii 🌹🌹

Sanjay  Ahlawat

Sanjay Ahlawat

Feb 23, 2026

बहुत ही सुन्दर पोस्ट है धन्यवाद शुभ दोपहर भगवान शिव आपको खुश और स्वस्थ रखें 🙏