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जय भोले नाथ! शुभ सोमवार। शुभप्रभात जी आज की सीख धैर्य और संयम पर आधारित है: > "सच्चा सामर्थ्य क्रोध को पी जाने में है, और असली विजय स्वयं पर नियंत्रण पाने में। जिस प्रकार पत्थर की रगड़ से ही आग निकलती है, उसी प्रकार कठिन परिस्थितियाँ ही मनुष्य के चरित्र का निर्माण करती हैं।" > आज के लिए एक छोटा विचार: जीवन में कुछ चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं, जैसे दूसरों का व्यवहार या समय की गति। लेकिन उन पर हमारी प्रतिक्रिया पूरी तरह हमारे वश में है। शांत रहकर लिया गया निर्णय अक्सर शोर मचाकर लिए गए निर्णय से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है। यहाँ एक विशेष संस्कृत श्लोक और प्रकृति का एक सुंदर उदाहरण दिया गया है जो हमें जीवन की गहराई समझाते हैं: संस्कृत श्लोक > परोपकाराय फलन्ति वृक्षा: परोपकाराय वहन्ति नद्य:। > परोपकाराय दुहन्ति गाव: परोपकाराय मिदं शरीरम्॥ > अर्थ: परोपकार के लिए ही वृक्ष फल देते हैं, नदियाँ परोपकार के लिए ही बहती हैं और गायें परोपकार के लिए ही दूध देती हैं। इसी प्रकार, यह मानव शरीर भी दूसरों की भलाई और सेवा के लिए ही है। प्रकृति से सीख: वटवृक्ष (Banyan Tree) एक विशाल वटवृक्ष हमें स्थिरता और विनम्रता का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाता है। * जड़ें और शाखाएं: जैसे-जैसे वटवृक्ष बड़ा और भारी होता जाता है, उसकी शाखाओं से नई जड़ें (Aerial roots) निकलकर जमीन को छू लेती हैं। यह हमें सिखाता है कि आप जीवन में चाहे कितनी भी ऊँचाई और सफलता प्राप्त कर लें, अपनी जड़ों और जमीन (संस्कारों) से जुड़े रहना ही आपको गिरने से बचाता है। * शीतलता: वह खुद कड़ी धूप सहता है, लेकिन अपने नीचे आने वाले हर राहगीर को समान रूप से छाया और शीतलता प्रदान करता है। आज का संकल्प: "आज मैं अपने कार्यों में थोड़ा और धैर्य रखूँगा और किसी एक व्यक्ति की निस्वार्थ सहायता करने का प्रयास करूँगा।"

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