
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
169 days ago
माधव की वह बांसुरी कोई साधारण बांसुरी नहीं थी। वह लकड़ी के एक पुराने टुकड़े से बनी थी, जिसे उसने खुद तराशा था। उसके पास कृष्ण जैसी सोने या चांदी की बांसुरी तो नहीं थी, पर उस बांसुरी में माधव का निश्छल प्रेम बसा था। जब माधव अपनी उस छोटी सी बांसुरी पर तान छेड़ता, तो मानों समय रुक जाता था। बांसुरी की जादुई धुन * गायों का खिंचाव: जैसे ही माधव बांसुरी बजाना शुरू करता, उसकी गाएं चरना छोड़कर उसके चारों ओर घेरा बनाकर खड़ी हो जातीं। * प्रकृति का साथ: कहते हैं कि जब वह बजती थी, तो यमुना की लहरें भी शांत हो जाती थीं और पक्षी चहचहाना बंद कर उसकी धुन सुनने लगते थे। एक अनोखी घटना एक दिन, माधव पेड़ की छांव में बैठकर अपनी उसी छोटी सी बांसुरी को बजाने में मग्न था। वह कान्हा की याद में इतना खो गया कि उसे सुध ही नहीं रही कि कब उसकी आंखों से आंसू छलक कर बांसुरी पर गिर पड़े। तभी उसे महसूस हुआ कि उसकी बांसुरी की धुन के साथ कोई और भी धुन मिल रही है—एक ऐसी आवाज़ जो उससे भी कहीं अधिक मधुर और दिव्य थी। माधव ने जैसे ही आंखें खोलीं, उसने देखा कि सामने एक सांवला सा बालक खड़ा है, जिसके हाथ में भी एक बांसुरी है। उस बालक ने मुस्कुराते हुए कहा, "माधव, तुम्हारी बांसुरी की पुकार मुझे खींच लाई।" माधव और उसकी अटूट भक्ति माधव एक ऐसा ग्वाला था जिसके पास न तो बहुत धन था और न ही कोई बहुत बड़ा पद, लेकिन उसके पास था 'प्रेम'। वह अपनी गायों को चराते समय अक्सर यमुना के किनारे बैठ जाता और घंटों तक वृंदावन की ओर देखता रहता। * उसकी दिनचर्या: वह हर सुबह उठकर सबसे पहले कान्हा के लिए एक सुंदर सी माला पिरोता। * उसका विश्वास: माधव का मानना था कि भले ही उसने कृष्ण को अपनी आँखों से न देखा हो, लेकिन जब हवा चलती है, तो वह कान्हा की बांसुरी की गूंज है। एक दिन की बात... एक शाम जब सूरज ढल रहा था और आसमान सिंदूरी हो गया था, माधव अपनी गायों को लेकर वापस लौट रहा था। अचानक उसे जंगल के रास्ते में एक मोरपंख गिरा हुआ मिला। उसने जैसे ही उसे उठाया, उसे पीछे से किसी के हंसने की आवाज़ सुनाई दी। माधव ठिठक गया। उसे लगा शायद यह उसका मन है, या फिर साक्षात् द्वारकाधीश उसके पास ही कहीं छिपे हुए हैं।
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