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SHREE SHARMA

90 days ago

अथ एकश्लोकी दुर्गा 🙏 ॐ दुर्गायै नमः। या अम्बा मधुकैटभप्रमथिनी या माहिषोन्मूलिनी या धूम्रेक्षण चण्डमुण्डमथिनी या रक्तबीजाशिनी। शक्तिः शुम्भनिशुम्भदैत्यदलिनी या सिद्धलक्ष्मीः परा सा दुर्गा नवकोटिविश्वसहिता मां पातु विश्वेश्वरी॥ ॥ इति एकश्लोकी दुर्गा ॥ एकश्लोकी दुर्गा — श्लोक का अर्थ (अर्थ ही दिया जा रहा है): ॐ दुर्गायै नमः। मैं माता दुर्गा को नमन करता/करती हूँ। या अम्बा मधुकैटभप्रमथिनी जो अम्बा (माता) मधु और कैटभ नामक असुरों का नाश करने वाली हैं। (अर्थ: जो हमारे भीतर के अहंकार और अज्ञान का नाश करती हैं) या माहिषोन्मूलिनी जो महिषासुर का पूर्ण रूप से संहार करने वाली हैं। (अर्थ: जो अत्याचार, जड़ता और नकारात्मक प्रवृत्तियों को जड़ से मिटाती हैं) या धूम्रेक्षण चण्डमुण्डमथिनी जो धूम्रलोचन, चण्ड और मुण्ड जैसे भयानक असुरों का विनाश करने वाली हैं। (अर्थ: जो क्रोध, हिंसा और विकृत विचारों का अंत करती हैं) या रक्तबीजाशिनी जो रक्तबीज का नाश करने वाली हैं। (अर्थ: जो बार-बार उत्पन्न होने वाली समस्याओं और दुर्गुणों को समाप्त करती हैं) शक्तिः शुम्भनिशुम्भदैत्यदलिनी जो शुम्भ-निशुम्भ जैसे दैत्यों का विनाश करने वाली परम शक्ति हैं। (अर्थ: जो अहंकार, सत्ता-लालसा और घमंड को तोड़ देती हैं) या सिद्धलक्ष्मीः परा जो परम सिद्धि देने वाली लक्ष्मी स्वरूपा हैं। (अर्थ: जो साधक को सिद्धि, स्थिरता और समृद्धि प्रदान करती हैं) सा दुर्गा नवकोटिविश्वसहिता मां पातु विश्वेश्वरी वे नवकोटि शक्तियों से युक्त, सम्पूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री माता दुर्गा मेरी रक्षा करें। (अर्थ: जो सम्पूर्ण सृष्टि की स्वामिनी हैं, वही मेरी रक्षा करें) ॥ इति एकश्लोकी दुर्गा ॥

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