MyMandirInstall

बज्रेश्वरी माता मंदिर का इतिहास पांडवों द्वारा दिव्य दर्शन के बाद मंदिर बनाने से शुरू होता है। यह एक महत्वपूर्ण शक्ति पीठ है, जहाँ देवी सती का बायां स्तन गिरा था। मंदिर को इतिहास में कई बार लूटा गया है, खासकर महमूद ग़ज़नवी द्वारा। १९०५ के भूकंप में इसके नष्ट होने के बाद १९२० में इसका पुनर्निर्माण किया गया। इतिहास पांडवों द्वारा स्थापना: एक पौराणिक कथा के अनुसार, पांडवों ने एक सपने में देवी दुर्गा को देखा था, जिन्होंने उन्हें सुरक्षित रहने के लिए नागकोटो में मंदिर बनाने का निर्देश दिया था। शक्ति पीठ: यह मंदिर एक शक्ति पीठ है, जहाँ देवी सती के शरीर के ५१ टुकड़े होने पर उनका बायां स्तन गिरा था, जैसा कि {Link: District Kangra की वेबसाइट पर बताया गया है}। हमले और लूट: मंदिर अपने अपार धन के कारण आक्रमणकारियों का निशाना बना। महमूद ग़ज़नवी ने इसे कम से कम पाँच बार लूटा था। बाद में, इसे फ़िरोज़ तुग़लक़ और फिर मुग़ल सम्राट अकबर ने पुनर्निर्मित किया। भूकंप और पुनर्निर्माण: १९०५ के एक शक्तिशाली भूकंप में मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो गया था, लेकिन १९२० में इसे सरकार द्वारा फिर से बनवाया गया, जैसा कि {Link: Incredible India पर उपलब्ध है}। वास्तुकला और महत्व वास्तुकला: मंदिर की वास्तुकला नागर शैली की है, जिसमें एक गुंबददार संरचना है। इसके दीवारों पर नक्काशी और छतों पर नीले टाइलों का काम दर्शनीय है। महत्व: इसे शक्ति पीठों में से एक माना जाता है और नवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान भक्तों की भारी भीड़ होती है।

Comments (1)

Pannalal Chouhan

Pannalal Chouhan

Nov 11, 2025

ॐ गण गणपतए नमः