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*📜 15 जनवरी, 2026 भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 151वें स्थापना दिवस। 📜* 15 जनवरी को मौसम विभाग का स्थापना दिवस है. भारत में पहले मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने की थी. 1785 में कोलकाता में वेधशाला बनाया गया. 1796 में मद्रास में वेधशाला की स्थापना की गई. 1826 में कोलाबा में वेधशाला बनाया गया. भारत मौसम विज्ञान विभाग 1875 में स्थापित किया गया था. उस समय हेंनरी फ्रांसिस ब्लेनफोर्ड को भारत मौसम विज्ञान विभाग का पहला मौसम विज्ञान रिपोर्टर नियुक्त किया गया. मई 1889 में सर जान इलिअट को तत्कालीन राजधानी कोलकाता में वेधशालाओं का पहला महानिदेशक नियुक्त किया गया था. भारत मौसम विज्ञान विभाग मुख्यालय को बाद में 1905 में शिमला फिर 1928 में पुणे और 1944 में नई दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया. *मिशन मौसम पहल क्या है?* * परिचय: मिशन मौसम एक सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान, मॉडलिंग और प्रसार में भारत के मौसम विभाग की क्षमताओं को बढ़ाना है। *उद्देश्य:* मौसम पूर्वानुमान में सुधार: 10 से 15 दिनों की अवधि के साथ, इस मिशन का उद्देश्य लघु से मध्यम अवधि के मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता को 5 से 10% तक बढ़ाना, बड़े महानगरीय क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान में 10% तक सुधार करना, तथा पूर्वानुमानों को पंचायत स्तर तक विस्तारित करना है। वर्तमान में, उष्ण लहरों जैसी चरम घटनाओं के लिये IMD के पूर्वानुमान की सटीकता लगभग 98%, जबकि भारी वर्षा के लिये लगभग 80% है। * प्रौद्योगिकी में निवेश: यह मौसम मॉडल और अवलोकन प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिये AI, मशीन लर्निंग और उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करेगा, जिसमें अतिरिक्त डॉपलर रडार और उपग्रहों की तैनाती भी शामिल है। * मौसम प्रबंधन: मिशन वर्षा प्रबंधन और बाढ़ और सूखे जैसी चरम घटनाओं को कम करने के लिये क्लाउड सीडिंग जैसी मौसम संशोधन तकनीकों का पता लगाएगा। * क्लाउड चैंबर अनुसंधान: क्लाउड गतिशीलता का अध्ययन करने और क्लाउड सीडिंग प्रयोगों के माध्यम से मौसम प्रबंधन में सुधार करने के लिये पुणे में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान में एक क्लाउड चैंबर स्थापित किया जाएगा । *चरण: यह मिशन 5 वर्षों की अवधि में 2 चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा।** इस चरण में लगभग 70 डॉप्लर रडार, उच्च निष्पादन वाले कंप्यूटर, पवन प्रोफाइलर और रेडियोमीटर की सहायता से प्रेक्षण नेटवर्क का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। * द्वितीय चरण (2026 से आगे): उपग्रहों और विमानों के माध्यम से प्रेक्षण क्षमताओं में और वृद्धि। *IMD विज़न-2047 दस्तावेज़ क्या है?* *परिचय:* यह एक युक्तिपूर्ण दस्तावेज़ है जिसमें वर्ष 2047 तक भारत में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और आपदा प्रबंधन में सुधार करने के उद्देश्य से महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं। इसमें आगामी दो वर्षों, दस वर्षों (2035) और बाईस वर्षों (2047) के लिये महत्त्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं। *मौसम विभाग डिफेंस की भी करता है मदद* मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा के अनुसार पूरे देश में आरएसआरडब्लू की संख्या 49 है, जो भारत मौसम विभाग विज्ञान के साथ ही कुछ डिफेंस के अंतर्गत आता है, इसके अलावा कुछ छोटे बड़े मौसम वेधशालाए हैं, जिनकी संख्या सैकड़ों में हैं. मौसम संबंधी पूर्वानुमान खासतौर पर वायुयान परिचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. *मुख्य उद्देश्य:* उग्र मौसम की पूर्ण पूर्वानुमेयता: उपग्रहों और रडारों जैसी उन्नत प्रेक्षण प्रणालियों का उपयोग करके, वर्ष 2047 तक गाँव और घरेलू स्तर पर उग्र मौसम की घटनाओं की पूर्ण रूप से पूर्वानुमेयता करने का लक्ष्य। *पूर्वानुमान सटीकता: लक्षित:* 3 दिनों के सभी पूर्वानुमानों के लिये 100% सटीकता 5 दिनों तक 90% सटीकता 7 दिनों तक 80% सटीकता 10 दिनों तक 70% सटीकता मौसम संबंधी घटनाओं से मृत्यु: चरम मौसम संबंधी घटनाओं से होने वाली मृत्यु की पूर्ण रूप से रोकथाम करने का लक्ष्य तथा आपदा प्रबंधन के लिये पूर्व चेतावनी सुनिश्चित करना।

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