
SHREE SHARMA
238 days ago
जिस देह के साथ हम जीवन जी रहे हैं, वह जीवन का पूरा सत्य नहीं है। यह देह बहुत छोटी है, क्षणभंगुर है। वास्तविक जीवन तो इस देह के बाद प्रारम्भ होता है—और वह जीवन अत्यंत दीर्घ, गूढ़ और जटिल है। उसे समझना, पहचानना और उससे मुक्त होना ही सबसे कठिन साधना है। आज का मनुष्य यह मानकर चल रहा है कि यही जीवन सब कुछ है। हम सोचते हैं मरने के बाद कुछ नहीं है। लेकिन यदि सच में मरने के बाद कुछ नहीं है, तो एक प्रश्न अनिवार्य रूप से उठता है— जन्म से पहले तुम कहाँ थे? और मरने के बाद कहाँ जाओगे? इस प्रश्न पर बहुत कम लोग विचार करते हैं। क्योंकि यह प्रश्न हमारे अहंकार, भोगप्रियता और असावधानी को चुनौती देता है। वृक्ष और मानव जीवन का गूढ़ संबंध यदि हम प्रकृति को ध्यान से देखें, तो वृक्ष और मानव जीवन में अद्भुत समानता दिखाई देती है। एक छोटा सा बीज वृक्ष बनता है, वृक्ष फल देता है, फल के भीतर फिर बीज होता है और उन बीजों में अनंत वृक्षों की संभावना छिपी रहती है बीज कभी नष्ट नहीं होता वह रूप बदलता है। ठीक उसी प्रकार कर्म, फल और पुनर्जन्म मानव के प्रत्येक कर्म का एक फल होता है। और उस फल के भीतर ही छिपा होता है कर्म-बीज। यही कर्म-बीज अगले जन्म का कारण बनता है। कोई भी कर्म नष्ट नहीं होता। वह केवल समय और परिस्थिति बदलकर प्रकट होता है। मृत्यु अंत नहीं, परिवर्तन है मृत्यु कोई समाप्ति नहीं है। यह केवल देह का त्याग है जैसे पुराने वस्त्र उतारकर नए वस्त्र धारण करना। आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है वह केवल यात्रा करती है। और इस यात्रा की दिशा तय होती है हमारे कर्मों से, हमारी वासनाओं से, और हमारी चेतना से। इसलिए यह जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण है यह मानव जीवन कोई साधारण अवसर नहीं है। यह वह अवस्था है जहाँ कर्म सुधारे जा सकते हैं बीज बदले जा सकते है बंधन काटे जा सकते हैं और मुक्ति का मार्ग चुना जा सकता है यदि इस जीवन को केवल भोग, भय और भ्रम में गँवा दिया गया तो आगे की यात्रा और भी लंबी, और भी कठिन हो जाती है। शिव अघोरनाथ

Comments (2)

Radhe Radhe
Jan 3, 2026
‼️ॐ नमःशिवाय, जय भोलेनाथ‼️
