
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
157 days ago
यह विचार बहुत ही गहरा और शांति देने वाला है। प्रेमानंद महाराज जी अक्सर इसी बात पर जोर देते हैं कि संसार में हमारा 'अपना' कोई नहीं है, केवल परमात्मा ही हमारे असली संबंधी हैं। जब हम यह मान लेते हैं कि "मैं प्रभु का हूँ", तो जीवन के बहुत सारे मानसिक बोझ अपने आप कम हो जाते हैं: * निर्भयता: यह भाव आने पर इंसान अकेला महसूस नहीं करता। उसे लगता है कि कोई अनंत शक्ति हमेशा उसके साथ है। * अहंकार की समाप्ति: जब हम खुद को ईश्वर का अंश मान लेते हैं, तो "मैं" और "मेरा" का घमंड धीरे-धीरे मिटने लगता है। * परम शांति: महाराज जी कहते हैं कि जैसे ही आप अपनी डोर प्रभु के हाथ में सौंपते हैं, वैसे ही चिंता का स्थान निश्चिंतता ले लेती है। महाराज जी की वाणी में यह सामर्थ्य है कि वह हमें दिखावे की भक्ति से हटाकर हृदय की सच्ची भक्ति की ओर ले जाती है।

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Mar 26, 2026
जय श्री राधे कृष्णा जी

vijay kushwaha
Mar 26, 2026
जय श्री राधे कृष्ण
